My motive through this blog is to draw the attention of my countrymen towards issues that needs our attention
Tuesday, March 27, 2018
गैर भाजपा सेक्युलर सरकारें हमारे मुस्लिम भाइयों को हम हिन्दू भाइयों के प्रति अपना प्रेम संदेश देने में पूर्ण सहयोग करती हुईं
Sunday, January 28, 2018
क्यों कांग्रेस पकौड़े बेचनेवाले और भिखारी में अंतर नहीं समझती
किन्तु एक पकौड़े बेचने वाले को भिखारी के समतुल्य बताना यानी कि बिना किसी के आगे हाथ फैलाकर, परिश्रम कर के, स्वाभिमान के साथ एक छोटा व्यवसाय कर अपना व परिवार का भरण-पोषण करना और भीख मांगने में कांग्रेस के अनुसार कोई अंतर नहीं है,
ये वक्तव्य उन करोड़ों भारतवासियों के स्वाभिमान पर चोट है जो ईमानदारी से स्वरोजगार द्वारा अपना जीवन यापन कर रहे हैं, वे भी भारत की अर्थव्यवस्था का ही एक हिस्सा है जो न केवल अपना व् अपने परिवार का अपितु एक दो सहायक रखकर उनकी भी आजीविका को सहारा देते हैं,
चिदम्बरम का ये वक्तव्य और भी आपत्तिजनक इसलिए हो जाता है क्योंकि ये भारत के पूर्व वित्तमंत्री का बयान है, वित्तमंत्री जो ये सुनिश्चित करने के लिए होता है कि अर्थव्यवस्था में सबका समावेश हो और सबके योगदान को सम्मान मिले, किन्तु जब वही छोटे व्यवसाय से आजीविका चलाने वालों को भिखारी बोले तो आप अनुमान लगा सकते हैं कि उसने देश की वित्त व्यवस्था किस प्रकार चलाई होगी।
यहां ये समझने की भूल न करें कि केवल मोदी द्वारा पकौड़े बेचने का उदाहरण देने पर ये प्रतिक्रिया आई है, यथार्थ ये है कि कांग्रेस के अनुसार देश का लोवर व मिडिल क्लास मात्र एक भिखारी है, याद कीजिये शशि थरूर द्वारा विमान में इकोनॉमी क्लास में यात्रा करने को किस प्रकार "कैटल क्लास" अर्थार्थ भेड़ बकरी क्लास कहा गया था, कैसे चाय बेचने वाला कहकर व घरों में काम करने वाली महिला की संतान कहकर नीचा दिखाने का प्रयत्न किया गया था,
समस्या कांग्रेस और उसके नेताओं की मनोदशा में हैं जिसके अनुसार हर छोटे व्यवसाय से जुड़ा व्यक्ति लोवर व मिडिल क्लास का व्यक्ति एक भीख मांगनेवाले के बराबर है, ये मानसिकता इसलिए हैं कि कांग्रेस का नेतृत्व व अधिकांश शीर्ष नेता सम्भ्रांत व धनी परिवारों से आते हैं जो अपने बाप दादाओं से विरासतों में मिले धन संपत्ति के बल पर ही आगे बढ़े हैं, इन लोगों ने कभी जीवन मे संघर्ष नहीं किया है न ही कभी बुरे दौर देखे हैं,
इसीलिए कठिन परिश्रम कर समाज मे अपनी जगह बनाने वाले लोग आपको शायद ही मिलें कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व में, और ऐसे लोगों को कांग्रेस में हेय दृष्टि से देखा जाता है, क्योंकि ऐसे लोग काबिलियत में वर्तमान नेताओं से कहीं अधिक सक्षम व परिपक्व हैं और वो कांग्रेस के वर्तमान शीर्ष नेतृत्व के कांग्रेस में स्थापित वर्चस्व के लिए एक चुनौती है, इसीलिए वर्तमान शीर्ष नेतृत्व सुनिश्चित करता है कि ऐसे लोग कभी कांग्रेस में बड़े व महत्वपूर्ण स्थानों तक न पहुंचे और उन स्थानों पर केवल कांग्रेस मानसिकता से ग्रसित चाटुकार ही सुषोभित हों जिससे कांग्रेस कि लगाम बस इन सम्भ्रांत लोगों के हाथ मे रहे जो धरातल से कोसों दूर एक अपने ही विलासिता से भरपूर स्वप्नलोक में जीवन जी रहे हैं
क्योंकि ये कांग्रेस के नेता न तो देश को समझ पाए हैं न ही दूर-दूर तक इनका इस देश के धरातल से कोई सम्बंध है, ये वो लोग हैं जो हर वर्ष 4 महीने विदेशों में छुट्टियाँ मनाते हैं और चुनाव आने से पूर्व कैम्पेनिंग में अपने को गरीबों का हितैषी घोषित कर इतिश्री कर लाइट हैं, इसीलिये हर निर्धन पृष्टभूमि का व्यक्ति कांग्रेस के लिए भिखारी और वोट बैंक का एक हिस्सा मात्र हैं, और इस मनोदशा का कारण है कि 70 सालों में काँग्रेस देश के लिये कुछ अच्छा नही कर सकी, और आज भी कांग्रेस की ये मनोदशा जस की तस बनी हुई है जो दर्शाती है कि क्यों कांग्रेस और उसकी विचारधारा न अतीत में देश हित मे थी और न आज वर्तमान में ही उसका देशहित से कोई सरोकार है
:रोहन शर्मा
Wednesday, November 22, 2017
गाँधी परिवार की मानसिक दासता से ग्रसित कांग्रेस
कांग्रेस के एक ट्विटर हैंडल ने एक फोटो पोस्ट कर मोदी को चायवाला बोलकर नीचा दिखाने का प्रयास किया क्योंकि कॉंग्रेसियों की समस्या ये है कि वो मानसिक रूप से गांधी परिवार की दासता से ग्रसित हैं, न कोई आत्मसम्मान है न ही देश के प्रति निष्ठा, यदि कुछ है, तो वो है अपने स्वामी गांधी परिवार की चाटुकारिता की चाह और बदले में पारितोषिक की आस, और ये एक भावना इतनी प्रबल है कि इसके अतिरिक्त कांग्रेसियों को कुछ सूझता ही नहीं है,
70 साल से काँग्रेसी इसी गांधी परिवार की गुलामी पीढ़ी दर पीढ़ी करते रहे हैं, और गांधी परिवार पूरी क्षमता से इस देश को व् जनता को लूटकर अर्जित किया धन का एक अंश अपने इन गुलामों को सदैव उपलब्ध करवाते आया है, इसीलिए देश व् समाज के हितों से इन काँग्रेसी गुलामों का कभी कोई सरोकार नहीं रहा, अतः ये निरंतर न केवल राष्ट्रीय हितों से समझौता करते रहे, अपितु निजी लाभ हेतु बढ़ चढ़ कर देश को अत्यधिक क्षति पहुंचाने का प्रयास करते रहे, कांग्रेसियों को केवल गांधी परिवार द्वारा फेंकी गयी मलाई चाटने व् लूट के एक हिस्से से मिली बोटियाँ चबाने व् चचोड़ने में आनंद आता है, इनका न कोई अपना विवेक होता है व् न ही कोई राजनीतिक निर्णय क्षमता, केवल गांधी परिवार का आदेश ही इनके लिए सर्वोपरि है और ये उस गांधी परिवार को आज भी देश का राजपरिवार समझते हैं, और यदि कोई भी प्रतिद्वंदी गांधी परिवार के सामने आ खड़ा होता है तो ये मानसिक गुलामी से ग्रस्त काँग्रेसी उसपर गन्दे से गन्दे हमले करते हैं और नीचता की पराकाष्ठा का प्रदर्शन करने से नहीं हिचकते,
Wednesday, October 11, 2017
पटाखों के बाद हिन्दुओं के अंतिम संस्कार पर रोक: सेक्युलर देश में चुन-चुनकर हिन्दुओं के अस्तित्व पर आक्रमण
दिवाली
पर पटाखों की बिक्री प्रतिबंधित करने के बाद अब NGT(नेशनल ग्रीन
ट्राइब्यूनल) हिंदुओं के अंतिम संस्कार पर प्रतिबंध की मांग कर रहा है, हवाला वही है "प्रदूषण", ये एक सोची समझी रणनीति है जिसमे लेफ्ट लिब्रल सेक्युलर गैंग कोर्ट में PIL से शुरुआत करता है, और समाज में विभिन्न पदों व् स्थानों में बैठे उनके सहयोगी उसके पक्ष में एक वातावरण बनाना आरम्भ कर देते हैं, बुद्धिजीवी कहलाये जाने वाले बड़े-बड़े लेख लिखते हैं, मिडिया की चर्चाओं में 4:1 के अनुपात का पैनल बैठाकर दर्शकों को भृमित किया जाता है, सोशल मीडिया पे विरोध करने वालों को रूढ़िवादी, संघी, घोषित करना आरम्भ हो जाता है, और अंत में न्यायालय में बैठे माननीय जज साहब अपना निर्णय सुना देते हैं, और सहिष्णु हिन्दू समाज बिना प्रश्न तर्क व् विरोध के निर्णय स्वीकार कर लेता हैं,
नदियों में दुर्गा प्रतिमाओं के विसर्जन की
परंपरा को ऐसे ही ध्वस्त किया गया था कि प्रदूषण हो रहा है, किन्तु सैंकड़ों
शहरों का हजारों लीटर मल-जल, सैंकड़ों फैक्ट्रियों का विषाक्त जल प्रतिदिन नदियों
में गिराया जाता है जिससे कोर्ट के अनुसार कोई प्रदूषण नहीं होता,दिवाली पर पटाखों की बिक्री पर प्रतिबंध की बात भी आयी है किन्तु ईद, न्यू ईयर, वैवाहिक कार्यक्रमों, IPL, क्रिकेट के अलावा अन्य खेल आयोजनों में पटाखों की बिक्री व् प्रयोग पर कोई प्रतिबन्ध नहीं है, न ही कोर्ट को वह प्रदूषण दिखाई देता है,
दही हांडी की ऊंचाई सुरक्षा की दुहाई देकर कोर्ट सुनिश्चित करता हैं, किन्तु मुहर्रम पर 2-2 वर्ष के बच्चों के माथे पर चीरा लगाकर खून निकालते मुस्लिम कोर्ट को नहीं दिखते
जल्लीकट्टू
में जानवरों के संग क्रूरता की बात कहकर कोर्ट प्रतिबन्ध लगा देता है,
किन्तु बकरीद पर करोड़ों जानवरों को तड़पा-तड़पा कर हलाल किया जाना कोर्ट के
अनुसार कोई क्रूरता नहीं अपितु पशु को चर्म आनंद की अनुभूति करवाना है, व्
करोड़ों मृत पशु के अंदरूनी अंग व् उसका खून जिसका कोई निस्तारण का प्रबंध
नहीं होता उससे हुआ प्रदूषण व् बीमारी फैलने की संभावना कोर्ट को नहीं
दिखती, दिखते हैं तो केवल हिंदुओं के त्यौहार।होली जलाने पर पेड़ों की कटाई दिख जाती है, किन्तु क्रिसमस पर करोड़ों हरे पेड़ों की कटाई नहीं दिखती, होली खेलने पर जल की बर्बादी होती है किन्तु करोड़ों लीटर जल बकरीद पर काटे गए करोड़ों जानवरों के मांस को धोने में बर्बाद नहीं होता,
ये है हमारा प्रगतिशील देश और ये है यहाँ के नियम व् न्याय व्यवस्था, और जिस प्रकार से घटनाएं घटित हो रही है, मुझे तथागत रॉय की बात सच होती दिख रही है, और हिन्दू वो सहिष्णु समाज है कि अंतिम संस्कार पर प्रतिबंध भी चुपचाप स्वीकार कर लेगा,
मुझे ऐसा इसलिए भी लगता है क्योंकि 1947 में धर्म के आधार पर बंटवारा होने के बाद जब हिन्दू कोड बिल आया उसमे निर्णय हुआ की हिन्दू एक ही पत्नी रखेगा, डिवोर्स में महिला को सम्पत्ति में अधिकार व् गुजारा भत्ता देय होगा, हिंदुओं के विवाह करने की आयु निश्चित कर दी गयी, किन्तु मुस्लिमों को चार बीवी, मौखिक तलाक, बिना किसी सम्पत्ति व् गुजारा भत्ते के और नाबालिग लड़कियों से शादी का अधिकार दिया गया, हिंदुओं ने इसका मुखर होकर विरोध नहीं किया,
हिंदुओं की धार्मिक यात्राओं पर टैक्स लगा दिया गया और मुसलमानों को उनकी हज यात्रा पर सरकारें हिंदुओं के टैक्स के पैसों से भेजती रहीं, हिन्दू चुपचाप देखता रहा
हिंदुओं के मंदिरों और मंदिरों की संपत्तियों पर सरकार ने बोर्ड बनवाकर कब्जा कर लिया किन्तु ईसाईयों के चर्च और इस्लामिक मस्जिदों व् दरगाहों पर ऐसी कोई बाध्यता नहीं लागू की गयी, उन्हें पूर्ण स्वतंत्रता दी गयी,
हिंदुओं की धार्मिक संस्थाओं को स्कूल गुरुकुल खोलने चलाने और धार्मिक शिक्षा देने से प्रतिबंधित कर दिया गया, किन्तु चर्च और इस्लामिक संगठनों को मदरसों में धार्मिक शिक्षा देने पर कोई रोक नहीं लगाई गई,
जब कम्युनल वायलेंस बिल आया जो किसी भी दंगे या हिंसा में हिंदुओं को छोड़कर सभी धर्म के लोगों को निरपराध घोषित करता था, उसका भी अधिकांश हिंदुओं ने विरोध नहीं किया था, व् अंधश्रद्धा बिल जो हिंदुओं के धार्मिक अनुष्ठानों को ही प्रतिबंधित करने जा रहा था उसका भी हिंदुओं ने विरोध नहीं किया था,
हिंदुओं के एक छोटे से वर्ग को छोड़कर किसी ने इन निर्णयों व् सौतेले व्यवहार का विरोध नहीं किया, और जिन्होंने विरोध किया उन्हें गोडसे-सावरकर का अनुयायी घोषित करने की मुहिम चला दी गयी, दुर्भाग्य ये है कि हिंदुओं पर, उनकी आस्था पर, उनके समाज पर और अब हिंदुओं के अस्तित्व पर निरंतर आक्रमण हो रहे हैं, और हिन्दू है कि शुतुरमुर्ग के समान अपना सर जमीन में घुसाये बैठा है, ये सोचकर की ये सेक्युलर देश है, सरकार और कोर्ट उसकी रक्षा करेंगे, किन्तु वो भूल चुका है जो स्वयं अपनी सहायता नहीं करता कोई उसकी सहायता को आगे नहीं आता।
Thursday, August 17, 2017
क्या भारत चीन से टकराने में सक्षम नहीं है, आईये परखते हैं की ये कितना सत्य है ?
बहुत से पत्रकार ये विचार फैलाने में लगे हैं की यदि भारत चीन का युद्ध हुआ तो भारत चीन से लड़ने में सक्षम नहीं है, किंतु ध्यान देने योग्य बात ये है की इन पत्रकारों को न तो सैन्य रणनीति का ज्ञान है, न भारत-चीन की थल व् जल सीमाओं की भौगोलिक परिस्थितियों का, इनमें से कइयों ने तो आज तक LAC (लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल) भी नही देखी है, युद्ध की नीतियों व् सामान्य नियमों से ये पूर्णतः अनभिज्ञ है, आज की युद्ध-नीति का नियम है की रक्षात्मक मुद्रा में बैठी सेना से जीतने हेतु 9:1 के रेशियो की आवश्यकता होती है, अर्थार्थ हर एक रक्षात्मक सैनिक के लिए 9 आक्रमणकारी सैनिक चाहिए, भारत ने करीब 1.5 लाख सैनिक चीन सीमा पर तैनात कर रखे हैं, जिसका मतलब उनसे निपटने के लिए चीन को 13.5 लाख सैनिक चाहिए, जो आंकड़ा चीन के पास नहीं है, इसके अलावा भारत ने दो माउंटेन डिविजन डोकलाम में लगा रखी है, और यहाँ भारतीय सेना ऊँचाई पर बैठी है जिसका सीधा रणनीतिक लाभ भारत को है,
चीन अपनी आवश्यकता का 80% तेल आयात करता है जो अंडमान के पास मलक्का स्ट्रेट से जाता है जो मात्र 1.7 किमी चौड़ा है और अंडमान में भारत का नौसैनिक अड्डा है, जहाँ यदि भारतीय नेवी ब्लॉकेड कर दे तो चीन तेल की एक एक बूँद के लिए मोहताज हो जायेगा और केवल अपने उसी तेल पर निर्भर रहेगा को उसने संग्रह कर के रख छोड़ा होगा, और तेल के अभाव में कोई भी सेना लम्बे समय तक युद्ध नहीं लड़ सकती,
चीन यदि मिसाइलों व् वायुसेना का प्रयोग करता है तो फिर सीधा युद्ध होगा जिसमे भारत विश्व की सबसे तीव्रतम क्रूज़ मिसाइल ब्रह्मोस का प्रयोग करेगा जो ध्वनि की गति से 3.5 गुना अधिक तेज है जिसकी रेंज MTCR के सदस्य बनने के बाद भारत दोगुनी कर चुका है जिसे केवल विश्व में एक ही मिसाइल रोक सकती है बराक-8 जो केवल भारत व् इसराइल के पास है, और ब्रह्मोस किसी भी आगे बढती सैन्य टुकड़ी, जहाज व् एयरक्राफ़्ट कैरियर तक को नष्ट कर सकती है, इसके अलावा भारत प्रहार, पृथ्वी-II,पृथ्वी-III,शौर्य, अग्नि-I,अग्नि-II,अग्नि-III,अग्नि-IV जैसी घातक मिसाइलों से चीन के शहरों पर भी आक्रमण कर सकता है, ध्यान देने की बात ये हैं की चीन के पास कोई बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम नहीं है,
चीनी हवाई हमलों, मिसाइलों व् युद्धक विमानों के लिए भारतीय सेना के पास पर्याप्त संख्या में स्टिंगर, बराक-8, आकाश, S-125, S-200, 9K33 Osa, 9K35 Strela-10, 9K22 Tunguska, SA-18 Grouse जैसी मिसाइल हैं, जो चीन के हवाई आक्रमण से निपटने में सक्षम हैं, यह स्थिति तब की है यदि भारत वायु सेना का प्रयोग न करे, यदि वायु सेना युद्ध में उतरती है तो MIG21, MIG29, Sukhoi30-MKI, MIRAGE-2000 जैसे युद्धक विमान विश्व के सर्वाधिक ट्रेंड भारतीय पायलट्स के हाथों में इतने घातक तो हैं ही की भारतीय एयरस्पेस से चीन के विमानों का सकुशल वापस जाना असंभव बना दें
इंडियन ओशन क्षेत्र में P8i व् MIG29K जैसे एयरक्राफ्ट, आईएनएस विक्रमादित्य जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर, आईएनएस चक्र, आईएनएस अरिहंत, आईएनएस चक्र, सिंधुघोष, शिशुमार क्लास की न्यूक्लियर व् कन्वेंशनल सबमरीन, कोलकाता, दिल्ली व् राजपूत क्लास के डीस्ट्रॉयर, शिवालिक, तलवार, ब्रह्मपुत्र व् गोदावरी क्लास के फ्रिगेट्स व् बराक-8, सागरिका, K-4 व् ब्रह्मोस से लैस भारतीय नेवी की स्थिति सिर्फ इस बात से समझ लीजिये की इस जल क्षेत्र से भारतीय नेवी इतनी भली प्रकार परिचित है अमेरिकी नेवी से युद्ध अभ्यास में पलड़ा बराबरी का रहा था,
अंत में यदि स्थिति परमाणु युद्ध तक आई तो भारत व् चीन दोनों के प्रमुख शहर एक दूसरे की मिसाइलों की जद में हैं और दोनों ही परमाणु शक्ति सम्पन्न देश हैं और चीन भली प्रकार जनता है की भारत के पास सेकेंड स्ट्राइक की क्षमता है अर्थार्त भारत समुद्र में कहीं से भी अपनी पनडुब्बी से परमाणु मिसाइल सागरिका या K-4 का प्रयोग कर सकता है
चीन की अर्थव्यवस्था निर्यात पर निर्भर हैं और लगभग सभी देश चीन के सस्ते कम गुणवत्ता वाले उत्पादों के कारण व्यापार घाटे से त्रस्त हैं, और इस समय अमेरिका, ब्रिटेन, फ़्रांस, जर्मनी, जापान व् लगभग संपूर्ण यूरोप जो चीन के लिए एक बड़े बाजार की तरह है वो भारत के साथ है,
युद्ध की दशा में ये देश चीन पर आर्थिक प्रतिबन्ध लगा सकते हैं जिससे चीनी अर्थव्यवस्था की कमर टूटना तय है, पश्चिमी देशों व् अमेरिका के भारत से घनिष्ठ होते सम्बन्धों को देखकर एक बात से इंकार नहीं किया जा सकता की चीन से सीधे युद्ध की स्थिति में नाटो फोर्सेस भारत के पक्ष में युद्ध कर सकती है, ऐसी स्थिति में चीन के पास केवल पाकिस्तान और नार्थ कोरिया जैसे सहयोगी होंगे और आर्थिक संकट से जूझ रहा रूस तटस्थ भूमिका में रहेगा,
मिडिया, पत्रकार बुद्धिजीवी स्वघोषित विश्लेषक चाहे कुछ भी दावे कर लें किन्तु यथार्थ यही है की भारत चीनी आक्रमण से निपटने में व् चीन को गम्भीर व् भारी क्षति पहुँचाने में पूर्ण रूप से सक्षम है और चीन भी भली प्रकार जानता है की भारत से युद्ध में जो आर्थिक क्षति उसे पहुंचेगी वो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए न केवल घातक सिद्ध होगी, अपीतु चीन के अपने आपको आर्थिक महाशक्ति के रूप में देखने के स्वप्न को सदैव के लिए चकनाचूर कर देगी, और दूसरी ओर चीन की कम्युनिस्ट पार्टी जो एक प्रोपगैंडा के अंतर्गत अपने को सर्वशक्तिमान दिखाकर लोकतंत्र की मांग करने वालों के हौसलों का आजतक दमन करती आई है उसके लिए युद्ध के उपरांत उठ खड़े होने वाली लोकतंत्र की मांग और बगावत से निपटना बहोत कठिन होगा और सम्भव है चीन में गृहयुद्ध की स्थिति आ जाये और आर्थिक संकट से पीड़ित चीन सोवियत संघ की तरह कई टुकड़ों में टूट जाये
लेखक: रोहन शर्मा
Sunday, July 16, 2017
मैं क्यों भाजपा को वोट देता हूँ, और कब तक वोट दूंगा ?
मैं इस देश का सामान्य सा मिडिल क्लास नागरिक हूँ, किसी पार्टी या नेता से कोई सम्बन्ध नहीं है, न ही किसी दक्षिणपंथ की ओर झुकाव है न ही वामपंथ की ओर, हाँ भारतीय राजनीति व् इतिहास को अवश्य बारीकी से अध्ययन किया है, और उसीके सबक मेरे दृष्टिकोण और विचारों के स्तम्भ है,
मुग़ल आक्रांताओं को पढ़ा है उनके अत्याचार पढ़े हैं, मुग़लों द्वारा वैदिक धर्म के करोड़ों अनुयायियों के जनसंहार और सोमनाथ,काशी, मथुरा, अयोध्या जैसे सहस्त्रों धर्मस्थलों का मुग़लों द्वारा किया गया भंजन पढ़ा हैं, अंग्रेजों के शासन को पढ़ा है, गांधी की अपरिपक्व हठधर्मिता व् तर्कहीन अहिंसा पढ़ी है व् छद्म सेक्युलरिज़्म पढ़ा है, सत्ता व् काम लोलुपता से ग्रस्त नेहरू व् इंदिरा को पढ़ा है, युद्ध में विजयश्री को आलिंगनबद्ध करने के पश्चात वार्ताओं में देश की पराजय को पढ़ा है, कांग्रेस का बड़ा पेड़ गिरने पे सिखों पर उसका दुष्परिणाम पढ़ा है, हिन्दू विरोधी सोनिया राज व् कांग्रेस का लूटतंत्र देखा है, शर्म अल शेख का वक्तव्य सुना है, इस्लामिक आतंकियों का महिमामंडन व् हिंदुओं पर मिथ्या आरोप लगाकर उन्हें आतंकी सिद्ध करने का प्रयास देखा है,
कश्मीर, कैराना, केरल, असम, बंगाल में हिंदुओं की दुर्दशा व् नरसंहार देखे है, यूनियन कार्बाइट के एंडरसन जैसे हजारों के हत्यारे को सम्मानपुर्वक छोड़े जाना पढ़ा है, शाहबानो पर न्यायालय के निर्णय को कलंकित करना पढ़ा है, एक देश में दो प्रकार के पर्सनल कानून देख रहा हूँ, एक वर्ग की धार्मिक यात्राओं पर टैक्स व् दूसरे मजहब को मजहबी यात्रा पर सब्सिडी देख रहा हूँ,
दलित की बेटी द्वारा सरकारी खर्च पर बनवायी गयी हजारों करोड़ रुपयों की मूर्तियों व् उसी दलित की बेटी के सैंडल लाने चार्टेड प्लेन का इस्तेमाल देखा है, समाजवाद के नाम पर सैफई महोत्सव की अय्याशियां देखि है, गरीबों के मसीहा द्वारा जानवरों का चारा खा जाना व् उसके बाकि परिवार का भू माफीया वाला रूप देखा है, एक मुख्यमंत्री द्वारा एक महिला आतंकी को राज्य की बेटी घोषित करते भी देखा है, बंगाल के कम्यूनिसटों द्वारा निर्दोषों के रक्त से खेली होलियां भी देखि है और 62 के युद्ध में कम्युनिस्टों द्वारा शत्रु का समर्थन भी पढ़ा है, धर्मनिरपेक्षता के नाम पर घोर साम्प्रदायिकता समर्थन व् अपराधी पक्ष का बचाव व् पीड़ित को दोषी सिद्ध करवाते देखा है, 2जी, कोयला, सैन्य, दामाद जी CWG घोटालों द्वारा जनता का खून चूसते नेता देखे है, आंदोलन के नाम पर निकल कर आये भृष्ट,मक्कार,झूठे, घोटालेबाज धूर्तों को देखा है, देश के लिए प्राण देने वाले सैनिकों को गालियां देते व् उनपर झूठे आरोप मढ़ते देखा है, मुम्बई हमला भी देखा है और सर्जिकल स्ट्राइक भी,
अब यदि कोई एक राजनितिक दल बचता है जो सेना को गालियां नहीं देता उलटे बिना सैन्य हथियारों की खरीद में कोई घोटाला किये, सेना को शीघ्र रक्षा उपकरणों को खरीदने का धन देता है तो वो भाजपा है,
कोई एक दल बचता है जो भारत के मूल निवासी सहिष्णु हिंदुओं,सिखों,बौद्धों,जैन के विरुद्ध दंगे नहीं करवाता, उनके नरसंहार नहीं करवाता तो वो भाजपा है,
यदि कोई एक दल बचता है जो सत्ता में होते हुए भी संघीय ढांचे का सम्मान कर व् संविधान की सीमाओं में रहकर देश को उन्नति पथ पर के जाने को कटिबद्ध है वो भाजपा है,
यदि कोई एक दल है जो मुस्लिम वोटों के लिए हिंदुओं,सिखों,बौद्धों, जैनों के अधिकारों का हनन नही करता वो भाजपा है,
यदि कोई दल है तो कश्मीर से धरा 370 हटाकर उसे भारत के अन्य राज्यों के समतुल्य लाने की बात करता है वो भाजपा है,
भारत के उत्तर पूर्व के विकास व् उसके महत्व को समझने व् उसके उत्थान हेतु ध्यान देने वाला दल भाजपा है,
बंगलदेशी घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने की बात करने वाला दल भाजपा है,
पिछले 14 वर्षों में महंगाई को न्यूनतम स्तर पे लाने वाला, सरकारी खजाने की सब्सिडी की चोरी DBT द्वारा रोकने वाला, विदेशी मुद्रा भंडार में सर्वाधिक वृद्धि करने वाला दल भाजपा है
महत्वपूर्ण रक्षा उपकरणों का देश में निर्माण करवाने का कदम उठाने वाला दल भाजपा है, जीवनरक्षक दवाओं के दाम घटाने वाला दल भाजपा है,
यदि आरक्षण के नाम पर समाज को तोड़ने की राजनीती न करने वाला कोई दल है तो भाजपा है,
माना कि भाजपा अत्यंत रक्षात्मक नीति का पालन कर रही है, गौरक्षकों जैसे व्यर्थ के विषयों पर छद्म अपराध बोध से ग्रसित है, आरक्षण जैसे कुप्रबंध को समाप्त करने में गम्भीर नहीं दिखती, केरल बंगाल में हिंदुओं की दुर्दशा पर राज्य सरकारों को भंग नही करती, धारा 370 पर लीक से हटकर अप्रत्याशित निर्णय नहीं ले रही,
किन्तु क्या देश की किसी भी अन्य मौजूद पार्टी से मैं आशा कर सकता हूँ की वो इन सब निर्णयों को कर देगी, व् भाजपा के समान ही कोई अनैतिक कार्य जैसे तुष्टिकरण, भ्र्ष्टाचार नहीं करेगी ? देश की अर्थव्यवस्था को हानि नहीं होने देगी, एक परिपक्व रक्षा व् विदेश नीति, का पालन करेगी व् संघीय ढांचे व् संविधान के दायरे में रहकर कार्य करेगी, जनहित में कुशल निर्णय लेगी ?
यदि उत्तर है नहीं, तो मैं तब तक भाजपा को वोट देता रहूंगा जब तक वो अपनी इन्ही वर्तमान नीतियों का पालन करती रहती है, अपनी विचारधारा व् एजेंडे में कोई बड़ा देश व् समाज विरोधी बदलाव नहीं करती है, या जब तक भाजपा से अच्छा, सबल व् सशक्त, राष्ट्रवादी राजनीतिक दल नहीं जन्म ले लेता।
Tuesday, July 4, 2017
Is consolidation of Hindu votes unfair ?
But I haven't seen Pujari of any Temple ordering the worshipers to vote for party of his liking,
In 2014 for the first time Hindu votes consolidated and voted for the party which had uniform civil code in its agenda, the party which said we won’t carry out appeasement policies if voted to power, and when that party came to power and started acting on its policies mentioned in election manifesto to stop appeasement of muslims being carried out in the garb of secularism, liberals, intellectuals, Media mugals,rival politicians & Muslims have started objecting to it,
But issue is not that simple, to understand it we must take a look at the history of India which reveals Hindus have faced persecutions after persecutions, Muslim invaders and rulers have slaughtered lakhs and lakhs of Hindus, built minars(Towers) of their severed heads, killed little Hindu children used them as slaves, Hindu women were captured in masses raped, used as sex slaves in harems and even sold as commodity, forced conversion were carried out and jaziya tax was imposed on Hindus, basically Hindus were made second class citizens in their own country by muslims, lakhs of Hindu Temples and idols were destroyed and discredited by Muslims and mosques were built over them even the Ayodhya Ram Temple, Kashi Shiv Temple, and Mathura krishna Temple were not spared by fanatically communal muslims.
helpless Hindus witnessed their country being divided on the basis of a religion, a foreign religion which didn't even originated on Indian soil, it came to India through foreign arab Invaders, and grew on the pillars of rape, sex slavery of Hindu women and forced conversion of Hindu men, after the partition of India in 1947 Hindus in the newly formed Islamic country Pakistan also met the similar fate large scale carnage was carried out women raped children killed in front of their mothers, barbarism was of such level that breasts of the Hindu women were cut so they couldn't breastfeed their infants, trains full of corpses of Hindus and severed body parts were sent to India from Islamic republic of pakistan.
Indian Muslims demanded sharia based personal law, govt. gave them right to have 4 wives at a time, triple talaq, marrying girl as young as 16, even allowed Muslim to convert people into their religion, but Muslims used inappropriate means to carry out such activities like “forced conversion” and “love jihad” targeting young Hindu girls, which has outraged a large section of Hindu population,
Indian govt provides low interest loans to Muslims and and scholarships to Muslim students,
such are the unfair policies carried out by successive governments, and the previous congress regime even went on to the extent of saying "Muslims have first right on the resources of India", they brought a draft of communal violence bill to persecute Hindus, and dissolved the strong anti-terror Law POTA when the Islamic terror was on the rise in India,
India is world’s largest victim of Islamic terror, thousands of innocents Hindus have lost their lives because of Islamic terror, intolerance among Muslim all across the globe is the reason they are always in the state of war with other communities and similar is the case in India, be it kashmir or kairana where carnage of Hindus was carried out by Muslims, rapes of Hindu women and girls was used as a weapon to spread panic among Hindus, fearing for their lives and security of their women Hindus were forced to leave their houses their property their land their livelihood and become a refugee in their own country,
similar practices are being carried out at present in states like west Bengal and Kerala, every riot in India has involvement of Muslims in it and almost every riot is initiated by Muslims and there are very few cases when culprits faced law and punished,
And now when people call it unfair that Hindu votes have consolidated its actually unfair on their part and reveals their hypocrisy because when all such above mentioned discrimination and crimes were going on against such a large tolerant and peaceful population of Hindus in country they were silent and didn’t even care to react, and now making issue out of it only displays their double standards.

