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Thursday, January 3, 2019

नेस्ले के सबसे प्रसिद्ध उत्पाद मैगी में जहरीला लेड है, स्वयं नेस्ले ने सुप्रीम कोर्ट में स्वीकारा

मैगी में जहरीला लेड होता है" यह बात स्वयं मैगी की निर्माता नेस्ले ने सुप्रीमकोर्ट में स्वीकारी है, और कुतर्क दिया कि वो हानिकारक स्तर से बहुत कम है,
जिसपर कोर्ट ने पूछा कि जब हमे पता है कि इसमें लेड जैसा जहरीला पदार्थ है तो भला हम उसे क्यों खाएं ? आखिर किसी खाद्य पदार्थ में किसी भी स्तर का कोई जहरीला पदार्थ हो ही क्यों ?
सरकार बनाम नेस्ले के इस केस में कोर्ट ने मैगी के विरुद्ध कार्यवाही पुनः आरंभ करने के निर्देश दिए हैं, सरकार को साधुवाद की उसने जनता के स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता दिखाई है और इस गम्भीर विषय को अब तक सुप्रीम कोर्ट में परसु भी किया है, और यदि आज देश में भाजपा के बदले कांग्रेस सरकार होती तो अब तक उन्होंने बैक चैनल डील कर नेस्ले से माल वसूलकर उसे क्लीन चिट दे दी होती और देश के करोड़ों नागरिकों के स्वस्थ्य के संग समझौता कर दिया होता,
वैसे यह बात तो हम सब स्वीकारेंगे की अधिकांश भारतीय घरों में मैगी सबसे कॉमन स्नैक के रूप में इस्तेमाल होती है, और हम भी कोई अपवाद नहीं हैं,
अधिकांश कामकाजी व्यक्ति मैगी इसलिए स्नैक के रुप में प्रयोग करते हैं क्योंकि मैगी बनाना सरल है, जल्दी बन भी जाती है, स्वाद भी ठीक होता है, कही बाहर भी जाना नही पड़ता तो समय बच जाता है ,और सस्ती भी होती है,
किन्तु अब जब स्वयं मैगी की निर्माता नेस्ले ने स्वीकार किया है कि मैगी में जहरीला लेड होता है, तो यह वास्तव मे सोचने का विषय है कि क्या बस अपनी सहूलियत भर के लिए अपने स्वास्थ्य से समझौता कर ऐसा स्नैक हमें व् हमारे परिजनों को कंज़्यूम करते रहना चाहिए ?
आखिर सहूलियत, स्वाद और सस्ता भर होने से जीवन के सबसे महत्वपूर्ण पक्ष स्वास्थ्य से समझौता तो नही किया जा सकता,
सोच लिया है कि अबसे स्नैक्स के रूप में अन्य विकल्प चुनूँगा जैसे बाटी चोखा, इडली, डोसा, छोले भटूरे, भेलपुरी, सेवपुरी, छोला समोसा, कटलेट या अन्य कुछ,
भले आने जाने में थोड़ा समय अधिक जाए किन्तु सब कुछ जानते हुए भी स्वास्थ्य से खिलवाड़ तो नहीं कर सकता।
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

डोनल्ड ट्रंप द्वारा मोदी का उपहास उड़ाना विकृत अमेरिकी सोच का परिचायक

डॉनल्ड ट्रंप बाबू को इस बात की मिर्ची लगी हुई है कि दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी स्टैंडिंग आर्मी के मालिक भारत ने अमेरिका के कहने पर अफगानिस्तान में अपनी फौज नहीं डिप्लॉय की,
और इसी खुन्नस में आज वो नरेंद्र मोदी द्वारा अफगानिस्तान में एक पुस्तकालय बनवाने का उपहास उड़ा रहे,
मैं नहीं जानता कि डोनाल्ड ट्रम्प को शिक्षा का महत्व कितना समझ में आता है, किंतु डॉनल्ड ट्रंप से मैं जानना चाहूंगा यदि अफगानिस्तान में सेना की उपस्थिति इतनी ही जरूरी है तो अमेरिका क्यों इतने वर्षों से निरंतर अफगानिस्तान से अपनी सेना कम करता जा रहा है, और आज वहां से किसी भी तरह निकलने की फिराक में क्यों है ?
यदि डॉनल्ड ट्रंप यह सोच कर बैठे हैं की अमेरिकंस अफगानिस्तान से निकल जाएंगे, और उनके स्थान पर इंडियन फोर्सेज अफगानिस्तान संभालेगी तो डोनल्ड ट्रम्प को यह पता होना चाहिए कि अफगानिस्तान अमेरिका द्वारा उत्पन्न की गई समस्या है,
अमेरिकंस जितना शीघ्र यह समझ व् स्वीकार लें कि भारत कोई पाकिस्तान नहीं है, और भारत तथा पाकिस्तान में जमीन आसमान का अंतर है, और यह अंतर सदैव बना रहेगा, उतना ही दोनों देशों के आपसी सम्बन्धों के लिए अच्छा होगा, हम भारतीय कोई मर्सिनरी नहीं हैं जो पैसों के बदले अपने सैनिकों को दूसरों के लिये मरने भेज दें, भारत ने दुनिया भर में अमेरिका की फैलाई अव्यवस्था को साफ करने का ठेका नहीं ले रखा है,
अफगानिस्तान की समस्या अमेरिका द्वारा निर्मित की गई है ,
किंतु उसके बावजूद भी :
🌀 भारत पूरे एशिया में अफगानिस्तान को सर्वाधिक दान देने वाला और विश्व का 5वां सर्वाधिक दान देने वाला देश है,
🌀 भारत अफगानिस्तान में सड़कों का निर्माण कर रहा है,
🌀 अफ़ग़ान पार्लियामेंट भारत ने बनाया है
🌀 पानी की कमी से जूझने वाले अफगानिस्तान को बांध बनाकर भारत ने दिए हैं
🌀 भारत ने अफगानिस्तान को 3 बिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता दी है
🌀 1500 से अधिक अफगानों को स्कॉलरशिप दी है
🌀 भारत, अफगानिस्तान के नागरिकों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहा है
🌀 16000 अफगानी छात्र आज विभिन्न सहायता प्रोग्राम के अंतर्गत भारत में पढ़ रहे हैं
🌀 सैकड़ों भारतीय कंपनियां और भारतीय प्रोफेशनल अफगानिस्तान का पुनर्निर्माण करने में लगे हुए हैं
🌀 अफगानी सैनिकों और फोर्सेस को भारत ट्रेन कर रहा है
🌀 अफगानिस्तान की सेना को आतंकियों से निपटने हेतु हैलीकॉप्टर गनशिप भारत ने दिए हैं
और इस सबके बावजूद ट्रम्प को यदि केवल भारत द्वारा अफगानिस्तान में निर्मित लाइब्रेरी ही दिखती है,
तो यह उनका संकीर्ण व् विकृत दृष्टिकोण है,
डॉनल्ड ट्रंप जैसे लोगों को यह समझने की आवश्यकता है की हर देश ना तो ब्रिटेन की तरह अमेरिका का पिछलग्गू बन सकता है, ना ही पाकिस्तान की तरह पैसों के बदले उनकी गंदगी उठाने वाला,
कुछ देशों का अपना स्वयं का आत्मसम्मान होता है और वे किसी अन्य की आर्थिक सहायता पर निर्भर नही होते, और वे दूसरों के साथ बराबरी का व्यवहार चाहते हैं।
किंतु हां मैं स्वीकार करता हूं कि अमेरिका ने पिछले 4.5 वर्षों में विभिन्न वैश्विक फोरम पर भारत के लिए लॉबिंग की है, एमटीसीआर, वासेनार ऑस्ट्रेलियन ग्रुप में भारत को सदस्यता दिलवाने में भूमिका निभाई है, साथ ही साथ एनएसजी में भी भारत का स्थान सुनिश्चित करने हेतु प्रयास किया, अपाचे, चिनूक, प्रिडेटर जैसे आर्म्ड ड्रोन बेचे हैं, परंतु याद रखें भारत ने यह सारे हथियार उनका मूल्य चुकाकर खरीदे हैं पाकिस्तान की तरह दान में नहीं लिए हैं,
और यह भी सत्य है कि इस सबके पीछे अमेरिका का अपना हित है और चीन को कंटेन करने के लिए उसे एशिया में भारत जैसी सशक्त आर्थिक, सामरिक और सैन्य महाशक्ति की आवश्यकता है, अतः ट्रम्प जैसों को अब वस्त्वविक्ता स्वीकारने की और भारत के निर्णयों का सम्मान करने की आदत डाल लेनी चाहिए।
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

Wednesday, January 2, 2019

इस्लामिक पत्रकारों का पाखंड

भारत के न्यायालय, सेक्युलर, लिबरल, बुद्धिजीवी, वामपंथी, फेमिनिस्ट ब्रिगेड के अनुसार भारत में स्थित हजारों अय्यप्पा मंदिर में से मात्र एक मंदिर में महिलाओं का अंदर ना जा पाना महिलाओं के अधिकारों का हनन है और लैंगिक भेदभाव है....
किंतु उसी भारत में स्थित करोड़ मस्जिदों में शांतिदूत महिलाओं का प्रवेश पूर्णता निषेध होना, छोटी बात है, शांतिदूतों का धार्मिक विषय है, और उनकी इस इस धार्मिक मान्यता का सम्मान होना चाहिए।
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

Tuesday, January 1, 2019

सबरीमाला की ८०० वर्ष प्राचीन परंपरा तोड़ने पर अड़ा क्रिस्लामो-कॉमि गिरोह

इस तस्वीर में
क्रिस्लामो-कॉमियों का गिरोह हिंदू महिलाओं को सबरीमाला में एंट्री दिलवाने के लिए सड़क पर उतरा है,
यह केरल की वामपन्थी सरकार का जवाब है उन 8 लाख हिन्दू अयप्पा भक्तों को जिसमें अधिकांश हिन्दू महिलाएं थीं, जिन्होंने अयप्पा ज्योति हाथों में लेकर मन्दिर परंपरा की रक्षा हेतु 600 किमी लंबी कतार में खड़े होकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन किया था,
जिसके बाद अभिव्यक्ति और विरोध करने की स्वतंत्रता की बीन बजाने वाले इन्ही वामपंथयों की केरल सरकार ने 1400 हिन्दू अयप्पा भक्तों के विरुद्ध मुकदमे लाद दिए और अब केरल सरकार ने राज्य की सभी महिला कर्मचारियों, ईसाई संगठनों और मुस्लिम संगठनों को एकत्र कर उन्हें बकायदा फंड कर इस नौटंकी का आयोजन किया है,
अब विचार कीजिये कि भला :
🌀 जो वामपंथी किसी धर्म को नही मानते और मजहब को अफीम कहते हैं,
🌀 वो मुस्लिम जो नमाज में कहते है कि अल्लाह के अलावा और कोई भगवान नही है,
🌀 और वो ईसाई जो हिंदू धर्म मे आस्था ही नहीं रखते,
भला इन लोगों को भगवान अयप्पा में अचानक से आस्था और उनके दर्शन में रुचि कैसे पैदा हो गयी ?
क्या कारण है कि हिन्दू धर्म के प्रति तिरस्कार का भाव रखने वाले ये लोग आज उसी हिन्दू धर्म के एक मन्दिर में प्रवेश हेतु इतने आतुर हैं कि उस मंदिर की प्राचीन परंपरा को ही भंग करने पर आमादा हो उठे हैं ?
भगवान अयप्पा में आस्था रखने वाली हिंदू महिलाएं स्वयं सबरीमाला मन्दिर में एंट्री नही चाहती हैं, फिर आज ये विधर्मी महिलाएं क्यों बेगानी शादी में फातिमा दीवानी बनी फिर रही हैं ?
सोंचिये आज ये महिला सशक्तिकरण और जेंडर इक्वलिटी की दुहाई देने वाले अडम्बरकारी लोगो में से :
🌀 कितने लोग हैं जो मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं को एंट्री दिलवाने के लिए निकलकर सड़क पर आए ?
🌀 केरल राज में ही स्थित मालंकारा चर्च के इनर सैन्कटम में महिलाओं का प्रवेश प्रतिबंधित है, आखिर इस क्रिस्लामोकॉमि गैंग ने वहां महिलाओं की एंट्री के लिए क्यों ऐसे प्रदर्शन नही किये ?
अब इन स्थानों पर क्रिस्लामोकॉमियों की जेंडर एकवैलिटी की बकैती कहाँ चली जाती है ? और वो बकैती जागृत केवल हिन्दू धर्म के विरुद्ध ही क्यों होती हैं ?
वस्त्वविक्ता यह है कि इस पूरे क्रिस्लामोकॉमि गैंग का उद्देश्य ही हिन्दू धर्म, हिंदू संस्कृति, हिन्दू विरासत और हिंदू परम्पराओं को छिन्न-भिन्न करना है, और यह सब आज भी उसी प्रयास में लगे हुए है, और यह बखेड़ा भी इन क्रिस्लामोकॉमियों के उसी विषाक्त एजेंडा का एक हिस्सा है,
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

Sunday, December 30, 2018

3 नाबालिग शांतिदूत 5 वर्षीय काफिर बच्ची संग दुष्कर्म का प्रयास करते पकड़े गए,
पूछताछ में शांतिदूत लड़कों ने बताया कि मदरसे के मौलवी ने उन्हें ऐसा करने का निर्देश दिया था, और मौलवी भी यही करता है।
आप "गंगा-जमुनी तहजीब" के ऑप्टिकल इल्यूजन में फंसे रहिये, स्वयं भी सेकुलर बने रहिए और अपने बच्चों को भी सेक्युलरिज्म का पाठ पढ़ा कर हिंदू-शांतिदूत भाईचारा सिखाइए,
किंतु वास्तविकता यह है कि, जिसे आप भाई बनाने चले हैं वह आपको, आपके बच्चों व् परिजनों को अपना चारा बनाने हेतु निरंतर प्रयासरत है।

बंगाल में महिला को डायन बताकर खदेड़ा: पूरा मिडिया बुद्धिजीवी समाज व् मानवाधिकारवादी चुप

घटना ममता बनर्जी के सेक्युलर राज पश्चिम बंगाल की है अतः किसी बुद्धिजीवी, मानवाधिकारवादी, पत्रकार और मीडिया हाउस ने इसपर न कोई प्रतिक्रिया दी न ही इसपर कोई रोष प्रकट किया,
हां यदि किसी भाजपा शासित राज की घटना होती तो पहले पीड़िता के वर्ण का पता किया जाता और उसी वर्ण के लोगों को भड़काकर और सड़क पर लाकर हिंसा व् आगजनी का नग्न नृत्य शुरू हो जाता ।।
ये भारत के जागरूक क्रांतिकारी हैं साहब, इनकी आवाज किस पीड़ित व् किस विषय पर मुखर होगी यह इसपर निर्भर करता है कि राज्य में किस पार्टी की सरकार का शासन है
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

Friday, December 28, 2018

मोदी की भाजपा सरकार ने विफल की रामजन्मभूमि पर हमले की आतंकी साजिश

Image may contain: one or more peopleमैंने बहुत से लोगों को कहते सुना है कि
"भाजपा व् मोदी ने
⭕️ हिंदुओं के लिए कुछ नहीं किया है,
⭕️ हिंदुत्व के लिए कुछ नहीं किया है
⭕️ राममंदिर के लिए कुछ नहीं किया है

और यदि भाजपा इन विषयों पर कोइ कदम नहीं उठा रही तो फिर कांग्रेस और अन्य भाजपा विरोधी पार्टियां कौन सी बुरी हैं?"
आज मैं यहाँ कोई हिन्दू हित के कामों की लंबी सूची प्रस्तुत कर आंकड़ों का खेल नहीं खेलने जा रहा हूँ, मैं तो बस उन लोगों से पूरी विनम्रता से कहना चाहता हूँ की, जेहादी आतंकवाद के निशाने पर सदैव हिन्दू और उनकी आस्था के स्थल ही होते हैं,
इन साढ़े चार वर्षों में इस्लामिक आतंकवाद की यदि कमर टूटी है और हिन्दू और उनके पूजा स्थलों पर आक्रमण बंद हुआ है तो मोदी व् भाजपा के प्रयासों के ही कारण हैं,
जेहादी तो हिंदुओं के धर्मस्थल रामजन्म भूमि को ही निशाने पर लेने की योजना बनाये बैठे थे किन्तु उसके पूर्व ही भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार ने उन्हें पकड़ लिया,
कांग्रेस व् अन्य भाजपा विरोधियों का शासन तो हम सब देख ही चुके हैं और यदि यह कहे कि भुगत चुके हैं तो वह गलत नहीं होगा,
⭕️ हम सबको पता है कांग्रेस और स्वघोषित "सेक्यूलर" पार्टियों के राज्य में हर हफ्ते देश में बम धमाके होते थे जिनमें अधिकांश हिंदू ही मारे जाते थे, कोई नहीं जानता था अगला निशाना कौन सा हिंदू हो जाए।
⭕️ हिंदुओं के त्योहारों से पूर्व बाजारों में बम धमाके हुआ करते थे त्योहारों के उत्सव की तैयारी में लगे हुए लोग आतंकवादियों के हाथों काल के गाल में ढकेल दिया जाते थे।
⭕️ हिंदुओं के मंदिरों में बम धमाके हुआ करते थे, मंदिर में ईश्वर का आशीर्वाद लेने जाने वाले हिन्दू उसी ईश्वर के घर में आतंकवादियों द्वारा बर्बरता पूर्वक मार दिए जाते थे।
उस कालखंड में देश का प्रत्येक नागरिक असुरक्षित महसूस किया करता था और सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस की अध्यक्षा सोनिया गांधी आतंकवादियों का निशाना बने हिंदुओं के शवों पर नहीं अपितु मरे हुए आतंकवादियों के शवों पर आंसू बहाया करती थी(बटाला हॉउस पर सोनिया गांधी की प्रतिक्रिया)
अतः विचार कीजिये की यदि आपने उसी कांग्रेस और उन स्वघोषित सेकुलर पार्टियों को वोट दे दिया, तो पुनः देश में वही स्थिति उत्पन्न होगी जो 2014 से पूर्व थी, हम सभी के प्राण संकट में होंगे, उस परिस्थिति में कोई नहीं जानता कि अगला निशाना हममें से कौन होगा,
आखिर हम सभी प्रतिदिन अपने अपने कामों से और कभी अपने परिवार के संग घरों से बाहर निकलते हैं, क्या गैर भाजपा राजनितिक दलों को वोट देकर अपने परिजनों व् अपने प्राण संकट में डालना सही निर्णय होगा ?
वह भी तब जब आप दोनों ही पक्षों का ट्रैक रिकॉर्ड देख व् अनुभव कर चुके हैं ?
यदि आप व् आपके प्रियजन ही सुरक्षित नहीं होंगे, आपके पूजास्थल ही सुरक्षित नहीं होंगे, तो कौन सी लोन माफ़ी, कौन सा हिंदुत्व और कौन सा हिन्दू हित ?
जीवित व् सुरक्षित रहेंगे तभी तो अपनी बातें मनवा सकेंगे न.....
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

कांग्रेस और अभिव्यक्ति की आज़ादी

कांग्रेस के शीर्ष नेता सार्वजनिक वक्तव्यों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर उपदेश देते मिल जाते हैं, किंतु कांग्रेस का वास्तविक कल्चर यह है कि जो कुछ उनके पक्ष में नहीं है उसे या तो दबा दो या प्रतिबंधित कर दो,
फिलहाल एक मूवी आ रही है "एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर" नामक, जिसमें कांग्रेस के 2004-2014 के शासनकाल में "ईमानदार" प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को दर्शाया गया है, वही "ईमानदार" मनमोहन सिंह जिनके कार्यकाल में देश में सबसे अधिक व् विश्व के सबसे बड़े घोटाले हुए और मनमोहन सिंह चुपचाप अपने राजनीतिक आकाओ को लूट में पूर्ण सहयोग करते रहे और जनता का धन व् देश का खजाना लुटवाते रहे,
उस काल खंड में मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार रहे संजय बारू की लिखी किताब एक्सिडेंटल प्राइम मिनिस्टर पर यह फ़िल्म बनी है, और कांग्रेस इस फ़िल्म को प्रतिबंधित करवाने तथा इसका प्रदर्शन रुकवाने हेतु कमर कस चुकी है,

ट्रेलर देख कर यह स्पष्ट हो जाता है कि यह फ़िल्म मनमोहन सिंह का चित्रण एक बेबस दीन-हीन व्यक्ति के रूप में करती है और कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्षा सोनिया गांधी को सुपर पीएम के रूप में दर्शाती है इसीलिए कांग्रेस नही चाहती कि यह फ़िल्म रिलीज़ हो,
वैसे किताबों व् फिल्मों को प्रतिबंधित करने का कांग्रेसी चलन जवाहरलाल नेहरू के समय का है, हमने कुछ समय पुर्व एक विस्तृत लेख तथ्यों सहित लिखा था की किस प्रकार कांग्रेस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दमन करती आ रही हैं,
आप चाहें तो इसे पढ़कर अनुमान लगा सकते हैं कि कांग्रेस अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कितना महत्व देती है।
https://m.facebook.com/Rohan.Sharma258/albums/1922131747866698/
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳
बेचारे पूर्व पीएम को खुद केक तक नहीं काटने दिया,
कायदे से तो केक अपने हाथ से खिलाया जाता है,
किंतु जिस तिरस्कार के भाव से केक दिया है, समझना मुश्किल हो रहा है कि दिया है या आगे फेंका है....
यह कृत्य ही कांग्रेस कल्चर के विषय में बहुत खुश उजागर कर देता है।
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

Thursday, December 27, 2018

देश के बहुसंख्यक समाज जिसे बुद्धिजीवियों ने "असहिष्णु", "आक्रामक" व् "कट्टरपंथी" घोषित कर रखा है, वहां माताएं अपने बच्चों को दान-पुण्य करने, निर्धन बच्चों को विद्यादान देने, निर्धन लोगों को भोजन व् पशु-पक्षियों को भोजन करवाने की सीख देती हैं, सदाचारी बनने की सीख देतीं हैं,
दूसरी ओर देश का "डरा हुआ", "असुरक्षित", "पीड़ित", "शोषित" व् वंचित "अल्पसंख्यक" समाज है जहां उनकी माताएं स्वयं अपने बच्चों को गाजी की उपाधि व् जन्नत प्राप्ति करवाने हेतु काफिरों का सफाया करने अपने ही बच्चों को जेहाद के मार्ग पर आगे बढाने में उनकी सहयोगी बनती हैं।
संस्कारों व् मानसिकता का अंतर पूर्णतः स्पष्ट है.....
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हिन्दू पुरुषों के प्रति कांग्रेस का सौतेला व्यवहार

Image may contain: 4 people, textतीन तलाक बिल पर कांग्रेस का कहना है कि, यह बिल मुस्लिम महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं, बल्कि मुस्लिम पुरुषों को दंडित करने वाला है,
यानी जो कांग्रेस हिन्दू कोड बिल व् हिन्दू मैरिज एक्ट लायी थी जिसके अंतर्गत
हिन्दू परुष
o यदि दूसरी शादी करे तो उसे जेल का प्रावधान,
o तलाक के लिए वो कोर्ट के चक्कर लगाए,
o तलाक में पत्नी को अपनी आधी सम्पत्ति दे,
o तलाक में अपने माता पिता की एक चौथाई सम्पती दे,
o महिला को गुजारा भत्ता दे,
o यदि नही देता तो जेल जाए

जबकि वही कांग्रेस आज चाहती है कि
o तलाक देने का कोई अधिकार मुस्लिम महिला के पास न हो।
मुस्लिम पुरुष :-
o तीन-तीन बीवियां रखे, जब चाहें तलाक देकर नई ले आये
o तीन शब्द बोलकर बीवी बच्चों को घर से निकाल सके।
o तलाक के बाद बीवी का शौहर और उसके परिवार की संपत्ति में कोई अधिकार न हो।
o तलाक के बाद बीवी को कोई गुजारा भत्ता न मिले।
o बीवी बच्चों को बिना एक पैसा दिए सड़क पर फेंक सके और उसे कोई दंड न हो।
o हलाला के नाम पर बीवी का यौन शोषण करवाये
कांग्रेसियों से जानना चाहूंगा कि जब मुस्लिम पुरुषों पर इस कानून के लागू होने को तुम उसे उन्हें दंडित करने की संज्ञा दे रहे हो, तो दशकों से तुमने जो हिन्दू कोड बिल व् हिन्दू मैरिज एक्ट हिन्दू पुरुषों पर लागू कर रखा है वो दंड तुमने हिंदुओं को ही क्यों दिया ?
हिंदु पुरुषों पर अलग कानून और मुस्लिम पुरूषों के लिए अलग कानून कौन सा लोकतांत्रिक न्याय है ?
क्या जनता इसका अर्थ ये निकाले की कांग्रेस हिंदू पुरुषों से द्वेष रखती हैं और मुस्लिम पुरुषों से प्रेम करती है?
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

Saturday, December 22, 2018

Image may contain: 1 person, smiling, text that says "Rahul Gandhi @RahulGandhi Converting India into a police state isn't going to solve your problems, Modi Ji. It's only going to prove to over 1 billion Indians, what an insecure dictator you really are."तुम इतना जो, चिचिया रहे हो,
क्या भेद है जो खुलने से घबरा रहे हो....
जो एमरजेंसी तुम्हारी दादी लगा गयी थी,
उससे अधिक क्या होगा जिसका भय दिखा रहे हो।।
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

बाल यौन शोषण को प्रोत्साहित करता आज का उदारवाद

Image may contain: one or more people and textये है वर्तमान में उदारवाद व् उन्नतिशीलता की वास्तविक तस्वीर जहां तथाकथित प्रोग्रेसिव ओपन माइंडेड लिब्रल माता पिता स्वयम अपने 10 वर्षीय पुत्र को लड़कियों की वेशभूषा धारण करवाकर उससे एक समलैंगिक बार में अश्लील नृत्य करवा रहे हैं और वयस्क समलैंगिक लोग उस लड़कियों की वेश भूषा धारण किये बच्चे पर नोट उड़ा रहे हैं और वो बच्चा उसे बटोर रहा है, यानी अब "उन्नतिशीलता" के नाम पर बाल यौन शोषण को भी मान्यता दी जा रही है और मीडिया व् LGBT उसे महिमामंडित कर रहा है, और उस बच्चे के माता-पिता अपने बच्चे के द्वारा धन कमा रहे हैं।
लगभग 6 वर्ष की आयु से इस बच्चे को इसके माता पिता द्वारा ड्रैग क्वीन के रूप में "ग्रूम" किया जा रहा है और गे प्राइड परेड्स में ले जाकर उससे परफॉर्म करवाया जा रहा है,
आखिर 6 वर्ष के बच्चे को जेंडर आइडेंटिटी और अपनी सेक्शुअल ओरिएंटेशन की भला क्या समझ होगी ?
किंतु एक बड़ा वर्ग इस बच्चे के माता-पिता की तारीफों के पुल बांध रहा है और उनकी उदारवादी उन्नतिशील सोच को सलाम कर रहा है
और ऐसे कई अन्य उदाहरण भी सामने आये हैं जहां ये LGBT और उसके समर्थक नाबालिग बच्चों को भृमित कर उन्हें अपनी सेक्शुएलिटी एक्सप्लोर करने के नाम पर बरगलाते हैं, और कई मामलों में तो यह कार्य बच्चों के पैरेंट्स ही करते हैं, और यह वाला उदाहरण तो सीधे सीधे बाल यौन शोषण ही है।
Image may contain: one or more people and text पश्चिम में उतपन्न हो रही इस विचित्र स्थिति पर एक ट्वीट पढ़ा था जिसमें कहा गया था कि एक ओर तो शांतिदूत शरणार्थी व् माइग्रेंट्स भरने के कारण वहां शांतिदूतों की आबादी बढ़ाई जा रही है, महिलाओं के विरुद्ध यौन शोषण व् बलात्कार जैसे अपराधों में निरन्तर बढ़ोतरी हो रही है, और दूसरी ओर इन समस्याओं से जूझ रहे समाज के युवाओं को इन वास्तविक विषयों से भटकाकर व् भृमित कर उन्हें होमोसेक्शुऐलिटी का महिमामंडन कर उस ओर मोड़ दिया जा रहा है।
और जिस प्रकार से हर पश्चिमी ट्रेंड को भारत में ढो कर ले आया जाता है, जैसे की "ब्लैक लाइव्स मैटर" का "दलित लाइव्स मैटर", "व्हाइट पैट्रिआर्कि" का "ब्राह्मानिकल पैट्रिआर्कि" तो अब विचारणीय बात है कि कहीं 377 के बाद इसी प्रकार की नौंटकी भारत में न आ जाए।

Friday, December 21, 2018

पाखंड की नई पराकाष्ठायें गढ़ते बॉलीवुड के मुस्लिम व् "सेक्युलर" सितारे

Image may contain: one or more people and textबॉलीवुड के शांतिदूत कलाकार जिनकी बीवियां हिन्दू हैं और उनसे उतपन्न बच्चे शांतिदूत, उन्हें आज भारत देश असुरक्षित लग रहा है,
यही शांतिदूत कलाकार हिन्दू बहुल देश भारत मे फिल्में कर करोड़ों की आय-सम्पत्ति, मान ,प्रतिष्ठा प्रसिद्धि अर्जित कर बैठे हैं, यानी सीधी सी बात है हिंदुओं के धन से ही आज यह सब प्राप्त किये बैठे हैं,
जबकि जिस सऊदी अरब की भूमि से इन शांतिदूतों का मजहब उतपन्न हुआ और यहां आया,
उसी शांतिदूतों के देश मे नियमानुसार कभी किसी हिन्दू को वहां की नागरिकता ही नही मिल सकती,
वहां यदि कोई हिन्दू पुरुष किसी शांतिदूत महिला से विवाह कर ले और तो इस्लामिक शरिया कानून के अंतर्गत उसे चौराहे पर ले जाकर उसका सर तलवार से काट देने का नियम है, और उस शांतिदूत महिला से हिन्दू बच्चे उतपन्न करने की बात तो भूल ही जाओ।

अतः बॉलिवुडिये और शांतिदूतों से कहना चाहता हूँ कि हिंदुओं के देश मे रहकर, हिंदुओं के ही पैसों पर अय्याशियां करने वाले कलाकार भारत देश को कोसने से पूर्व एक बार यह अवश्य याद रखें कि उन्ही के मजहब वाले शांतिदूत देशों में शांतिदूतों द्वारा हिंदुओं संग कैसा व्यवहार होता है, और वहां गैर शांतिदूतों पर कौन से और कैसे कानून लागू होते हैं।
यह सत्य एक बार सोच लेने के बाद अवश्य ये शांतिदूत बॉलिवुडिये भारत मे सुरक्षित अनुभव करने लगेंगे।
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

Thursday, December 20, 2018

बॉलीवुड के बुद्धिपिशाचों की हिंदू विरोधी मानसिकता

बॉलीवुड की हस्तियां बुद्धिजीविता का नकाब पहनकर टोलरेंस, सेक्युलरिज्म, लिबर्लिज्म की बड़ी बड़ी बातें तो करते मिल जाते हैं,
जबकि वास्तविकता यह है की
♦️ यदि कोई टैलेंटेड कलाकर भोर में मस्जिद के लाउडस्पीकर से आने वाली तेज़ आवाज व् शोर के विरुद्ध एक ट्वीट कर दे, तो यही बॉलीवुड उसका पुर्ण बहिष्कार कर देता है और उसे काम देना बन्द कर देता है, ऐसा इसलिए क्योंकि वो टैलेंटेड कलाकर बुरा बॉलीवुडिया है
♦️ वहीं यदि कोई बॉलीवुडिया अपनी फिल्मों में देश की बहुसंख्यक आबादी की आस्था, उनकी संस्कृति, उनके आराध्यों का उपहास उड़ाए, सार्वजनिक रूप से बयान देकर देश को असहिष्णु घोषित कर अल्पसंख्यकों के लिए राष्ट्र को असुरक्षित बताकर देश की छवि कलंकित करने का प्रयास करे तो ऐसा व्यक्ति बॉलिवुडिये परिवार का अच्छा सदस्य माना जाता है।
♦️ जब बॉलिवुडिये कलाकरों का एक गैंग मिलकर अल्पसंख्यक समुदाय के व्यक्ति से जुड़ी अफवाह पर फर्जी रोष प्रकट करे और बहुसंख्यक आबादी की आस्था पर आक्रमण शुरू करे, जबकी बहुसंख्यक आबादी के पीड़ित संग घटित हुई वास्तविक घटना पर मुंह सिलकर बैठ जाए, तो वह गैंग भी बॉलिवुडिये परिवार का अच्छा सदस्य है।
♦️ जब बॉलीवुड के सदस्य बहुसंख्यक आबादी के त्योहारों की आतिशबाजी को अनुचित बताये और स्वयं विवाह समारोह व् ईसाई नववर्ष की आतिशबाजियों के फ़ोटो व् वीडियो खुशी से सार्वजनिक करे, तथा बहुसंख्यक आबादी के रंग के त्योहार पर जल की बर्बादी का रोना रोये, अग्नि प्रज्वल्लित करने को पर्यावरण को हानि पहुंचाना घोषित करे किंतु, निरीह पशु वध को त्योहार के रूप में मनाएं, और मरे पशु को धोने में लगने वाले पानी पर चुप रहे और मृत पशु के शव का भक्षण करते हुए अपनी फोटो सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करे, और Xmas के नाम पर स्वयं पेड़ काटें तो वो अच्छे बॉलिवुडिये हैं।
♦️ जो बॉलिवुडिये देश की विभिन्न हस्तियों पर ऊल-जलूल भद्दे वक्तव्य दें और उन्हें मोरल साइंस का पाठ पढ़ाएं, किन्तु स्वयं शराब के नशे में अथवा स्टारडम के नशे में मीडिया के कैमरों के सामने अशोभनीय आचरण करें, लोगों संग दुर्व्यवहार करें तो वो अच्छे बॉलिवुडिये हैं।
♦️ यदि किसी बॉलिवुडिये के सम्बंध अंडरवर्ल्ड या आतंकवादी से हैं वो उनकी पार्टियों में जाते हैं या फिर यदि किसी बॉलिवुडिये डायरेक्टर-प्रोड्यूसर का बेटा एक वैश्विक आतंकी को 26/11 आतंकी हमले की रेकी में सहायता करता है और उसका बाप उस हमले का आरोप एक बहुसंख्यक वर्ग के एक रष्ट्रवादी संगठन पर मढ़ देता है तो फिर वो अच्छे बॉलिवुडिये हैं।
♦️ यदि कोई कलाकर आतंकी देश के कलाकारों को बॉलीवुड में मिल रहे काम का विरोध करे तो वो बुरा बॉलीवुडिया है, किन्तु जो बॉलीवुडिया उसी आतंकी देश के कलाकारों को काम दे, उस आतंकी देश की शान में कसीदे गढ़े और उस आतंकी देश और उसकी जनता को अपने देश से अच्छा व् बेहतर बताये तो वो अच्छा बॉलीवुडिया है।
♦️ यदि कोई बॉलीवुडिया राष्ट्रविरोधी प्रोपगैंडा,आतंकवाद, नक्सलवाद, राष्ट्रविरोधी कैंपेन और देशद्रोही नारों का विरोध करे तो वो बुरा बॉलीवुडिया है और पूरा बॉलीवुड मिलकर उसका बहिष्कार कर देता है,
किन्तु जो बौलीवीडिये नक्सलियों का, आतंकियों का, राष्ट्रविरोधियों तत्वों की गतिविधियों और देशद्रोही नारों का अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर समर्थन करें तो वो अच्छे बॉलिवुडिये हैं।
शाश्वत सत्य यह है कि यही आचरण बॉलीवुड और उससे जुड़े लोगों का वास्तविक चरित्र है।
🇮🇳Rohan Sharma🇮🇳

Thursday, April 26, 2018

क्या धर्म का मार्ग केवल बाबाओं धर्मगुरुओं के मार्गदर्शन से मिल सकता है ?

आसाराम, राधे माँ, भीमानंद जैसों को बनाने में सबसे बड़ा हाथ उन अज्ञानियों का है जो अध्यात्म के नाम पर ऐसे लोगों को पोषित करते हैं, यदि अध्यात्म के प्रति रुचि जागृत हुई है तो अपने धर्म ग्रन्थ उठाकर स्वयं पढ़ना आरंभ करो,किसी और का इंटरप्रेटेशन क्यों, स्वयं अपना इंटरप्रेटेशन करो, समझ तुम्हारे अंदर भी है, मनुष्य वो भी हैं, तुम भी हो,

किंतु मेहनत कौन करे, पकी पकाई चाहिये, बब्बा जी को धन उपलब्ध करवाएंगे उनके मुख से निकली कहानियों-प्रसंगों-बातों को ही अध्यात्म समझ लेंगे,
सत्य की खोज स्वयं करनी होती है, ईश्वर व शांति व्यक्ति के अंदर ही होती हैं, गीता जैसा सरल व सुलभ ग्रन्थ उपलब्ध है किंतु उसे नही पढ़ना, बब्बा जी जो पट्टी पढ़ाएंगे वो ही पढेंगे और आंख बंद कर बिना अपना विवेक लगाए उसी पथ पर चलेंगे जो बब्बा जी बताएंगे, और बब्बा जी की विलासिता पूर्ण करने के साधन बन जाएंगे और उनके द्वारा शोषित होंगे,

कभी “अहं ब्रह्मास्मि” का अर्थ समझने का प्रयास किया ?
धर्म की असंख्य व्याख्याएं हैं किंतु यदि भगवान कृष्ण व राम के जीवन का अध्यन करें तो पाएंगे कि निस्वार्थ व निष्काम भाव से अपने कर्तव्यों व दायित्वों का निर्वहन करना ही धर्म है।
तो भैया इन बब्बाओं के बताए मार्ग के बदले जो उदाहरण भगवान राम व कृष्ण प्रस्तुत कर गए हैं उन्हीं का अनुसरण कर लो, अपना सनातन धर्म तो वैसे ही ओपन सोर्स एन्ड्रॉयड के समान है जो सबको अपने हिसाब से कस्टमाइजेशन और ट्वीक्स की अनुमति दे देता है,
अतः अध्यात्म की यात्रा स्वयं ज्ञान एकत्र करने से करो सत्य व शांति की प्राप्ति हेतु परिश्रम करों अपनी स्वयं की समझ विकसित करो सनातन धर्म मे कोई बाध्यता नहीं है इतना विशाल है कि अपना मोक्ष का मार्ग स्वयं चुनने की स्वतंत्रता देता है,
बिना संसार को त्यागे सन्यास लिए समाज की सेवा जैसे आप विद्या दान कर, लोगों को रोजगार देकर, चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध करवाकर, पशुओं की सेवा कर, धर्म का प्रचार प्रसार उसकी रक्षा हेतु काम कर भी आप मोक्ष पा सकते हैं, जाप, पाठ,पूजा, भजन कीर्तन ही एकमात्र मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग नही है,
सनातन धर्म ये नही कहता कि ईश्वर से डरो और उसके आगे नतमस्तक हो जाओ अन्यथा तुम्हे “दोज़ख” या “हैल” में भेज दिया जाएगा, सनातन धर्म कर्म आधारित है, जैसे कर्म करोगे वैसे ही फल मिलेंगे,
एक सैनिक जो राष्ट्र की रक्षा कर रहा है वो देश के नागरिकों के प्राणों की भी रक्षा में योगदान दे रहा है, ये उसका त्याग व अच्छा कर्म है अतः वो बिना जाप,पाठ, पूजा,भजन,कीर्तन करते हुए भी मोक्ष का अधिकारी है,
एक शिक्षक जो बच्चों को शिक्षित कर उनके भविष्य का निर्माण कर रहा है वो भी अच्छा कर्म कर रहा है मोक्ष का अधिकारी है,
निष्ठा से व्यवसाय करने वाला उद्योगपति जो एक साथ कई लोगों को रोजगार उपलब्ध करवाकर उनको उनकी आजीविका चलाने में सहयोग कर रहा है वो उसका अच्छा कर्म है वो भी मोक्ष का अधिकारी है,
एक ईमानदार चिकित्सक लोगों को स्वस्थ्य लाभ करवाकर अच्छा कर्म कर रहा है वो भी मोक्ष का अधिकारी है,
ईमानदारी से पशुपालन कर उनकी सेवा कर अपनी आजीविका चलाने वाला व्यक्ति भी अच्छा कर्म कर रहा है, अतः मोक्ष का अधिकारी है,
एक राजनेता जो ईमानदारी से राष्ट्र के निर्माण व उत्थान में योगदान दे रहा है और जनता की सेवा कर रहा है वो उसका अच्छा कर्म है अतः वो भी मोक्ष का आधिकारी है,
और वो सामान्य मनुष्य जो ईमानदारी से कार्य कर अपने परिवार का भरण पोषण कर अपने कर्तव्य का निर्वहन कर रहा है वो भी अच्छा कर्म कर रहा है अतः वो भी मोक्ष का अधिकारी है।

ये गीता ज्ञान का मेरा अपना इंटरप्रेटेशन है,

आप अभी अपने हिसाब से धर्म की व्यख्या कर उसका पालन कर सकते हैं, आपको किसी बब्बा जी के विलासिता पूर्ण करने के साधन बनने की आवश्यकता नहीं है।

:रोहन शर्मा

Sunday, April 15, 2018

कठुआ पर आक्रोश, किंतु उस जैसी दूसरी घटनाओं पर रहस्यमय मौन.....

भारत एक लोकताँत्रिक समाज है जिसका अर्थ है प्रत्येक भारतीय नागरिक के एक समान अधिकार हैं, मत, संप्रदाय, भाषा, जाती अथवा मज़हब के आधार पर न किसी को किसी से कमतर आंका जा सकता है न ही किसी से अधिक, हर समाज का स्याह पहलू होता है, हर समाज में अपराध होते हैं कुछ छोटे मोटे और कुछ जघन्य, मेरे विचार से छोटे अपराधियों को कारावास व् गंभीर जघन्य अपराधी जैसे बलात्कारी व् हत्यारे को मृत्युदंड मिलना चाहिये और पूरे समाज, मिडिया, प्रबुद्ध वर्ग को मुखर होकर प्रत्येक ऐसे अपराध के विरुद्ध खड़े होकर मोर्चा खोल देना चाहिए, तभी हम कह सकते हैं की हम एक जागरूक व् संवेदनशील समाज हैं



3 माह पूर्व कश्मीर के कठुआ में एक बालिका असीफा के संग जघन्य अपराध हुआ, बलात्कार कर उसकी हत्या कर दी गयी, दोनों हिन्दू अपराधी पकडे गये और कानून के शिकंजे में हैं, कल कांग्रेस पार्टी ने इस विषय को उठाया, एक कैंडल मार्च निकाली, मिडिया ने, समाज ने अपना दायित्व निभाया और मुखर होकर विरोध किया, एक दबाव का निर्माण किया,
कल पूरे देश का मिडिया, बुद्धिजीवी वर्ग, समाजसेवक, चिंतक, विचारक, फिल्म-जगत की हस्तियां सब केवल कठुआ रेप केस की ही बात कर रहे थे,
किंतु विचारणीय बात ये हैं की तीन माह के बाद ये आक्रोश क्यों दिखा ? ये जागरूकता, संवेदनशीलता, ये ज्ञान बोध 3 माह के बाद ही क्यों हुआ, तुरंत क्यों नहीं ?
अपराधी तो 2 दिन बाद ही पकड़ लिये गये थे, तो फिर एकाएक पूरा इलेक्ट्रॉनिक मिडिया, सोशल मिडिया, फेसबुक, ट्विट्टर, वाट्सएप्प, प्रबुद्ध लेखक, राजनेता, बुद्धिजीवी, चिंतक, विचारक व् जागरूक फ्ल्मि हस्तियां, राजनीतिक कार्यकर्ता सब तीन माह बाद एकसाथ एक ही दिन कैसे जागृत हो उठे ? अब तक तीन महीने से किसकी प्रतीक्षा कर रहे थे ? किसी विशेष महूरत की या किसी के आदेश की ?  
किंतु कोई बात नहीं, देर आये दुरुस्त आये, सबने एक अच्छे उद्देश्य हेतु एक सुर में आवाज़ उठाई जो अच्छी बात है, असीफा केस के विषय में सबने अपने विचार प्रकट किये और मेरे अंदर भी उसके अपराधियों के प्रति वही घृणा का भाव है,

किंतु सोशल मिडिया पर असीफा केस के इस विरोध में मैंने देखा की कई बुद्धिजीवियों, पत्रकारों, फ़िल्मी हस्तियों, समाजिक कार्यकर्ताओं ने असीफा के अपराधियों के नाम पर पूरे हिन्दू धर्म और हिन्दू धर्म के अनुयायियों को ही अपराधी ठहराना आरम्भ कर दिया, कहीं भगवान राम और सीता के कार्टून बनाकर राम के भक्त हिंदुओं को बलात्कारी कहा जा रहा था और कहीं हिंदुओं को गिद्ध घोषित किया जा रहा था, रोचक बात ये हैं की ये सब कहने वाले वही लोग हैं जो हर आतंकवादी घटना के बाद सोशल मिडिया पर आकर कहते हैं की आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, आतंकवाद को धर्म के चश्मे से मत देखो,
और आज वे सभी लोग एक रेप पीडिता बच्ची के नाम पर हिन्दू धर्म पर आक्षेप लगाकर पूरे हिन्दू समाज को बलात्कारी कहकर नीचा दिखाने का भरसक प्रयास कर रहे थे, मुझे समझ नहीं आया की ये लोग बलात्कार का विरोध कर रहे हैं या हिंदुओं और हिन्दू धर्म का ?     
किंतु कोई बात नहीं भावनाएं हैं भड़क जाती हैं,

अब चलिए आपको ऐसी ही कुछ और घटनाओं के विषय में बताता हूँ, कुछ और भी केस हैं जहाँ पीड़ितायें इतनी अधिक अभागी निकलीं की मिडिया, समाज व् प्रबुद्ध वर्ग ने उन के साथ हुए अपराध को अखबार के 6वें पन्ने में एक छोटे से कोने में छोटे छोटे अक्षरों में लिखकर अपने दायित्व की इतिश्री कर ली

मैं पिछले दिनों घटित हुई घटनाओं का यहाँ उल्लेख करना चाहता हूँ और साथ में न्यूज़ लिंक के स्क्रीन-शॉट्स भी पोस्ट कर रहा हूँ



1.     23 मार्च 2018: असम, दस वर्षीय बच्ची घर में अकेली थी जाकिर हुसैन, व् उसके दो अन्य मुस्लिम साथियों ने घर में घुसकर उसका सामूहिक बलात्कार किया और मिट्टी का तेल डालकर बच्ची को जिंदा जला दिया

2.     10 अप्रैल 2018: यूपी, बिजनौर, 7 वर्षीय बच्ची का सलमान, मोहम्मद और ख़ुर्शीद नामक मुस्लिमों ने सामूहिक बलात्कार किया व् हत्या कर दी



3.     मार्च 2018 जयपुर: हिंदू लड़की ने जाकिर नामक मुस्लिम युवक को मुंहबोला राखी भाई बनाया, जब लड़की का विवाह तय हुआ तो उसी जाकिर ने धोखे से लड़की को नशीला पदार्थ खिलाकर बेहोश किया, उसके साथ बलात्कार किया, उसका वीडियो बनाया और लड़की के मंगेतर को भेज दिया, लड़की की शादी टूट गयी, लड़की ने आत्महत्या कर ली



4.     नवंबर 2017: मेरठ/बवाना यूपी: अमिरुद्दीन नामक मुस्लिम युवक ने एक दलित युवती को लव जिहाद के अंतर्गत हिन्दू नाम बताकर फँसाया सिनेमाहॉल में ले जाकर अपने साथी वसीम के संग उसका सामूहिक बलात्कार किया

5.     नवंबर 2017: केरल, अमीरुल इस्लाम नामक व्यक्ति ने 29 वर्षीय लॉ की छात्रा जीशा के घर में घुसकर उसका बलात्कार किया और चाकू से उसके गुप्तांगों पर 30 वार किये और उसकी अंतड़ियाँ निकाल ली, पीडिता जीशा दर्दनाक मृत्यु को प्राप्त हुई

6.     28 दिसम्बर 2017: दिल्ली, ६० वर्षीय मोहम्मद जैनुल ने एक पांच व् एक 9 वर्षीय बच्ची को मिठाई देने के बहाने बुलाया दोनों का बलात्कार किया और दोनों को 5-5 रूपये देकर घटना के विषय में किसी को न बताने के लिए कहा



7.     16 मार्च 2018: असम नागाओ, 8 मुस्लिमों ने मिलकर हिन्दू महिला के पति को बाँधकर उसके सामने हिन्दू पत्नी का सामूहिक बलात्कार किया, बलात्कारियों के नाम मर्जत अली, इकरामुल हक, फैजुल हक, नज़रुल हक, मजिदुल हक, हबीबुर रहमान, सुल्तान, म्म्ताज़ रहमान

8.     7 अप्रैल 2018: यूपी, हिन्दू लड़की को फिरासत नामक मुस्लिम ने लव जेहाद में फँसाया, लड़की को घर से भगाया, उसका धर्म परिवर्तन कर उसको हिन्दू से मुसलमान बनाया उससे निकाह किया, फिर अपने मुस्लिम साथियों संग मिलकर लड़की का सामूहिक बलात्कार किया और और उसे केरल ले जाकर वहां वेश्यालय में बेच दिया



9.     2 अप्रैल 2018: बरपेटा असम, १२ वर्षीय हिन्दू बच्ची संग बांग्लादेशी मुस्लिमों ने सामूहिक बलात्कार किया, लड़की की गला दबाकर हत्या कर दी और शव को खेत में फेंक कर भाग गये

10.  4 अप्रैल 2018, बिस्वनाथ चरियाली असम, मुस्लिम मौलवी अब्दुल ने 18 वर्षीय हिन्दू लड़की का बलात्कार किया

11.   9 अप्रैल 2018, करगहर बिहार, 6 वर्षीय हिन्दू बच्ची का मेराज आलम नामक व्यक्ति ने बलात्कार किया, रक्तस्राव से पीड़ित बच्ची की मृत्यु 

12.  17 नवंबर 2017, अनुपगढ मध्यप्रदेश, शौकत नामक युवक ने एक छात्रा पूजा कोतमा की तलवार से गले पर वार कर उसका सर धड़ से अलग कर हत्या कर दी क्योंकि उसने शौकत के प्रेम प्रस्ताव को ठुकरा दिया था




13.  7 मार्च 2018, बंगाल, 3 वर्षीय बच्ची अपने 5 वर्षीय भाई संग बस स्टैंड पर खेल रही थी, बस क्लीनर 45 वर्षीय शेख मुन्ना नामक मुस्लिम बच्ची को उठाकर बस के अंदर ले गया और उसके साथ बलात्कार किया, और पूरे समय लड़की का 5 वर्षीय भाई बस का दरवाजा पीटता रहा हाथ जोड़ के शेख मुन्ना से विनती करता रहा की उसकी बहन को छोड़ दे



14.  अप्रैल 2018, बंगाल रामपुरहट, सूरी के मुस्लिम लव जेहादी ने अपने को हिन्दू बताकर 12वीं की छात्रा सुमी लेट्ट को फँसाया, लड़की को घर से भगाया, उसका धर्म परिवर्तन कर उसका नाम सायरा बीबी रखा गया, कुछ दिन बाद लड़की के माता पिता को लड़की का अधजला शव सूरी के एक अस्पताल से मिला



15.  20 मार्च 2018, सहापरा बंगाल, एक तलाक़शुदा 12 वर्षीय बच्ची की मां को शेख अमीरुल ने फँसाया, उससे निकाह किया, निजी तस्वीरें व् अन्तरंग क्षणों के वीडियो बनाकर उसे ब्लैकमेल किया उसकी पूँजी हथियाई, और उसकी 8 वर्षीय बच्ची का बलात्कार कर दिया

16.  जनवरी 2018, मुज़फ़्फरनगर यूपी, हिंदू लड़की की मुस्लिम सहेली ने उसे अपने घर बुलाया, जहाँ मुस्लिम सहेली के भाई ने अपने बहन के सामने उसकी हिन्दू सहेली का बलात्कार किया और मुस्लिम बहन वो पूरा बलात्कार अपने फोन में रिकॉर्ड करती रही, और फिर दोनों भाई बहन ने हिंदू लड़की को धमकी दी की यदि हिन्दू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल कर मुसलमान नहीं बनी तो उसके बलात्कार का वीडियो वायरल कर देंगे



17.  23 फरवरी 2018, चतरा झारखंड, इसरार, सद्दाम, शाहीद आलम तीन भाइयों ने 15 वर्षीय हिन्दू लड़की के संग सामूहिक बलात्कार किया, और फिर उसे जिंदा जलाकर मार डाला

18.   27 दिसम्बर 2017, रामगढ़ झारखंड, किरन कुमारी नामक लड़की ने एक मुस्लिम आदिल अंसारी से शादी कर ली, आदिल और उसके परिवारवाले लड़की पर हिन्दू धर्म छोड़कर इस्लाम कबूल कर मुसलमान बनने का दबाव बनाने लगे लड़की नहीं मानी तो लड़के के बाप, लड़के के चाचा दो अन्य लोग व् आदिल लड़की को रात में सूनसान स्थान पर ले गए, लड़के के बाप, चाचा, और उनके साथ आये दोनों सहयोगियों ने लड़की के संग सामूहिक बलात्कार किया लड़की की हत्या करी, और शव नदी में फेंक दिया



19.  नवंबर 2017,मेरठ यूपी : शादाब नामक पूर्व नौकर ने प्रेरणा गुप्ता नामक महिला की हत्या कर दी, शादाब ने महिला संग बलात्कार किया था, लोकलाज के डर से महिला ने किसी को नहीं बताया और शादाब को नौकरी से निकाल दिया, महिला का विवाह तय हो गया था, शादाब ने महिला की हत्या करी और उसका अश्लील वीडियो उसके होने  मंगेतर को भेज दिया

20.  26 जनवरी 2018, असम ढेकियाजौली, सरस्वती पूजा मनाने गयी 15 वर्षीय हिन्दू बच्ची का उसके मुस्लिम मित्र व् 3 अन्य मुस्लिमों ने सामूहिक बलात्कार किया, लड़की अपने मुस्लिम मित्र संग सरस्वती पूजा का पंडाल देखने गयी थी जहाँ से उसे निर्जन स्थान पर ले जाकर उसके संग सामूहिक बलात्कार किया गया

21.  4 अप्रैल 2018, मुरादाबाद यूपी, मुस्लिम युवक ने अपने को हिन्दू बताकर हिन्दू लड़की को प्रेम जाल में फँसाया, उसे घर से भगा के लगाया जबरन उसे हिन्दू से मुसलमान बनाने हेतु धर्मपरिवर्तन करवाया और फिर अपने मुस्लिम साथियों के साथ मिलकर लड़की के संग सामूहिक बलात्कार किया

22.  28 फरवरी 2018, इलाहाबाद, मुस्लिम दुकानदार अनवर व् वाजिद की दुकान से मोबाईल लेने गयी 12वीं की हिन्दू छात्रा को 6 मुसलमानों ने बंधक बनाया, उसे जबरन इस्लाम कबूल करने को कहा, लड़की नहीं मानी उसके संग 6 मुस्लिमों ने सामूहिक बलात्कार किया, फिर फंसने के डर से लड़की पर मोबाईल चोरी का आरोप लगाकर जेल भिजवा दिया

23.  9 जनवरी 2018, बुलंदशहर यूपी: ज़ुल्फ़िकार,इस्माइल और दिलशाद नामक मुस्लिमों ने 16 वर्षीय हिन्दू बच्ची जो शाम को कोचिंग से पढ़कर वापस घर जा रही थी का अपहरण किया नेशनल हाइवे पर ले जाकर उसके संग सामूहिक बलात्कार किया, और लड़की की गला घोंटकर हत्या कर दी और शव नहर में फेंक दिया

24.  अगस्त 2017, इलाहाबाद यूपी: हिना तलरेजा नामक लड़की ने एक अदनान नामक मुस्लिम से शादी कर ली, अदनान के घरवालों को हिना पसंद नहीं थी और उन्होंने उसकी दूसरी शादी करवाने की योजना बनाई, हिना इससे नाराज थी, अदनान ने हिना को माफ़ी मांगने के बहाने बुलाया साथ में अपने चार मुस्लिम दोस्तों को लिया उसे निर्जन स्थान पर ले गए जहाँ अदनान ने अपने दोस्तों से हिना का सामूहिक बलात्कार करवाया और फिर उसके माथे से पिस्टल सटाकर गोली मार दी, इतने से मन नहीं भरा तो गोली के घाव में चाक़ू घुसेडकर चेहरा फाड़ दिया

25.  5 जनवरी 2018, मेरठ: एक दलित युवती पर मुस्लिम युवक बिट्टू धर्मपरिवर्तन और निकाह का दबाव बना रहा था लड़की नहीं मानी तो बिट्टू उसके भाई काले, जीजा महताब, चचेरे भाई शाहबाज ने लड़की का अपहरण किया 7 दिनों तक उसका सामूहिक बलात्कार किया और धर्मपरिवर्तन न करने पर बलात्कार के वीडियो वायरल करने की धमकी दी

26.  15 मार्च 2018, असम हेलकंडी: 13 वर्षीय हिन्दू आदिवासी बच्ची का जेशिमुद्दीन बोर्भुइया के बलात्कार व् निर्मम हत्या कर दी

27.  19 नवंबर 2017, बंकुरा बंगाल: 3 वर्षीय हिन्दू बच्ची शौंच के लिए बाहर गयी, जहाँ उसके पड़ोसी रहमान ने उस तीन वर्षीय बच्ची संग बलात्कार किया और उसकी हत्या कर दी

28.  15 दिसंबर 2017, शिकोहाबाद: एक हिन्दू किशोरी का मुस्लिम पड़ोसियों ने अपहरण किया नशे के इंजेक्शन देकर 12 दिन तक किशोरी संग सामूहिक बलात्कार किया गया, 27 दिसम्बर को जब कार से वे मुस्लिम लड़की को वेश्यालय बेचने जा रहे थे तो लड़की को होश आया और वो चलती कार से कूदकर भागी

29.  16 जनवरी 2018: दिल्ली: 12 वर्षीय लड़के की तलाक़शुदा मां 38 वर्षीय हिन्दू महिला का उसके 30 वर्षीय मुस्लिम प्रेमी शाहबाद खान ने बलात्कार किया फिर कार में गला घोटकर उसकी हत्या की और महिला का नग्न शव उसके घर फेंक आया



30.  13 अप्रैल 2018, शामली यूपी: कैराना के दंगा पीड़ित हिन्दू की नाबालिग बेटी संग सामूहिक बलात्कार अपराधी आरिफ, फ़िरोज़, सद्दाम और रईस फरार


इन घटनाओं को हमारे समाज, नेताओं, बुद्धिजीवियों ने नजरअंदाज ही कर दिया, किन्तु
क्या आपने किसी को भी भारत के सबसे बड़े अजमेर शरीफ दरगाह के 500 हिन्दू छात्राओं के रेप ब्लैकमेल काण्ड पर एक शब्द भी लिखते और बोलते सुना है ?

90 के दशक में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की अजमेर शरीफ दरगाह में 500 हिन्दू स्कूली छात्राओं का रेप और ब्लैकमेल का बहुत बड़ा काण्ड हुआ जिसमें दरगाह को चलाने वाले खादिमों, संचालकों और कांग्रेस नेताओं ने मिलकर भारत में अब तक के सबसे बड़े रेप और ब्लैकमेल काण्ड को अंजाम दिया था, जिसमे सभी 18  अपराधी मुसलमान थे, और सभी 500 पीडिता स्कूली छात्राएं हिंदू,  प्रमुख अपराधी फारूख चिश्ती खादिम के परिवार से था और यूथ कांग्रेस का नेता था तथा अजमेर यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष भी था, और नफ़ीस चिश्ती व् अनवर चिश्ती यूथ कांग्रेस यूनिट के उपाध्यक्ष व् जॉयंट सेक्रेटरी थे और अजमेर दरगाह के खादिमों के परिवार से थे, घानी चिश्ती, मोइजुल्लाह, इशरत अली, अनवर, शमसुद्दीन चिश्ती, सुहैल चिश्ती और अलामास अन्य प्रमुख अपराधी थे

अजमेर शरीफ दरगाह को चलाने वाले उसके संचालक व् खादिम और कांग्रेस नेताओं ने पहले एक हिन्दू लड़की को फंसाकर उसका सामूहिक बलात्कार किया और उसकी नग्न अश्लील व् बलात्कार के समय की फोटो खींची और उसे ब्लैकमेल किया की अपनी सहेलियों व् साथ पढने वाली लड़कियों को हमारे पास लाओ वरना फोटो सार्वजनिक कर दी जाएँगी, स्कूली छात्राएं अपरिपक्व थी और जाल में फंसती चली गयी, उस लड़की ने विवश होकर अपनी अन्य सहेलियों को भी दरगाह के खादिमों के चंगुल में फंसवा दिया, यही कार्य हर नई लड़की के संग करते गये और नयी बलात्कार पीडिता को नयी लड़कियाँ लाने को कहा जाने लगा, हर नयी लड़की आती उसका बलात्कार होता उसकी फोटो खींचतीं और उसे अपनी सहेलियों को लाने के लिए बाध्य किया जाता. और जबतब यौन शोषण के लिए दरगाह के खादिम और कांग्रेस नेता हिन्दू छात्राओं को बुला लेते और फिर उन लड़कियों के घरवालों को फोटो दिखाकर धन उगाही और ब्लैकमेलिंग भी शुरू हुई, पुलिस प्रशासन व् अधिकारी इस पूरे काण्ड से परिचित थे किंतु कांग्रेस के नेता शामिल थे, केंद्र और राज्य में कांग्रेस की सरकारें थी और अजमेर शरीफ दरगाह के खादिम बहुत रसूख और पहुँच वाले थे, अजमेर दरगाह के खादिम मोइन्न्नुदीन चिश्ती के वंशज हैं अतः इतने बड़े लोगों पर कार्यवाही की हिम्मत प्रशासन में नहीं थी, कई छात्राओं ने प्रतिदिन हो रहे यौन शोषण और ब्लैकमेलिंग से त्रस्त होकर आत्महत्या कर ली थी, ये सब तब-तक चलता रहा जब तक नवज्योति के एडिटर देवबंधु चौधरी ने साहस कर इस विषय को प्रकाशित नहीं किया और FIR नहीं करवाई
अब विचार कीजिये की कैसे हमारे समाज में इतनी वीभत्स व् शर्मनाक घटना घटित हुई और किसी ने मुखर होकर विरोध नहीं किया, किसी ने अपराधियों के मजहब पर और उनके अजमेर दरगाह से सीधे सम्बन्धों पर प्रश्न नहीं उठाये ?



ऐसा नहीं है कि मैं केवल हिंदू पीड़ितों की बात कर रहा हूँ, मुस्लिम रेप पीड़ितों के प्रति हमारा समाज चुप्पी साध लेता है यदि बलात्कारी उन्ही की कौम का हो तो कुछ ऐसी ही घटनाएं प्रस्तुत कर रहा हूँ



  1. 23 मई 2013, कश्मीर बडगाम: मदरसे के मौलवी गुलज़ार अहमद ने अपने मदरसे की 500 बच्चियों व् महिलाओं का बलात्कार किया था, वो इस्लाम के नाम पर यौन शोषण किया करता था और बच्चियों को खुदा का खौफ दिखाकर चुप कराता था
  2. 28 फरवरी 2018, दिल्ली नरेला : 70 वर्षीय मौलवी ने 9 वर्षीय बच्ची से बलात्कार किया
  3. 3 अप्रैल 2018, चतरा: मौलाना ने 12 वर्षीय बच्ची संग बलात्कार किया
  4. 30 दिसंबर 2017,लखनऊ: मदरसा संचालक मोहम्मद तैयब जिया ने मदरसे की 51 बच्चियों संग बलात्कार किया और बच्चियों को बंधक बनाकर मदरसे में रखा हुआ था
  5. 14 अप्रैल 2018, मुरादाबाद भगवतपुर, एक मस्जिद के अंदर इमाम ने दुकान संचालक संग मिलकर 14 वर्षीय बच्ची का बलात्कार किया
  6.  25 अक्तूबर 2017, मुंबई, मस्जिद के इमाम ने 8 वर्षीय बच्ची का तीन बार बलात्कार किया
  7. मार्च 2018, कश्मीर: बजलता इलाके के मदरसे में मौलवी शाहनवाज़ ने 7 वर्षीय बच्ची का बलात्कार किया
  8. अक्तूबर 2017, मुंबई नागपाड़ा: मस्जिद के इमाम ने नाबालिग बच्ची का बलात्कार किया
  9. फरवरी 2018, असम: मदरसे के मौलवी ने 19 वर्षीय लड़की के संग कई बार बलात्कार किया, जब लड़की गर्भवती हुई तब मामला सामने आया




अब कुछ कश्मीर की घटनाओं का उल्लेख करता हूँ

·       1990 कश्मीर: एक स्कूल टीचर बबली रैना का उसके परिवार के सामने मुस्लिमों द्वारा बलात्कार किया गया और फिर परिवार समेत उसकी हत्या कर दी गयी

·       1990 कश्मीर: मुस्लिमों द्वारा 12 वर्षीय हिन्दू लड़की शालू बसंती का उसके पिता विजय चंद के संग HMT कोलोनी से अपहरण किया गया, पिता के सामने बच्ची का कई बार सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर दोनों की हत्या कर दी गयी

·       1990 कश्मीर: मिसेज़ पॉल BSF अधिकारी की पत्नी का मुस्लिमों द्वारा अपहरण किया गया कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया गया और फिर उनका शव टूटी टांगों के साथ सडक किनारे पड़ा पाया गया

·       1990 कश्मीर: गिरजा टिक्कू एक लैब असिसटेंट थीं मुस्लिमों ने उनका अपहरण किया कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया और फिर लकड़ी काटने वाली आरा मशीन से गिरजा टिक्कू के शरीर के टुकड़े कर दिए गए, पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला की जब उन्हें काटा जा रहा था तब वो जीवित थी

·       1990 कश्मीर: सरला भट श्रीनगर के अनंतनाग के मेडिकल इंस्टिट्यूट में नर्स थीं मुस्लिमों ने उनका अपहरण किया कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया, फिर हत्या कर शव को सडक किनारे फेंक दिया

·       1990 कश्मीर: पर्णा गंजू का उसके पति के संग अपहरण किया गया पति के सामने ही उसके संग कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया गया, फिर पति-पत्नी दोनों की हत्या कर शव नदी में फेंक दिए गये

·       1990 कश्मीर: मुस्लिमों ने सोहन लाल बारू के घर में घुसकर उनके सामने ही उनकी पत्नी विमला और छोटी बच्ची अर्चना संग सामूहिक बलात्कार किया छोटी बच्ची अर्चना ने बलात्कार के समय ही दम तोड़ दिया उसके बाद सोहन लाल और उनकी पत्नी को गोली मार दी गयी  




इन घटनाओं पर दृष्टि डालने के बाद मुझे समझ नहीं आता की इन अभागी पीड़ितों के लिए बुद्धिजीवी वर्ग, समाजसेवक, राजनैतिक पार्टियों, राजनेताओं व् राजनैतिक कार्यकर्ताओं, बड़े बड़े पत्रकारों,  इलेक्ट्रॉनिक मिडिया,  सोशल मिडिया फेसबुक,  ट्विट्टर,  वाट्सएप्प,  प्रबुद्ध लेखक, चिंतक,  विचारक व् जागरूक फ्ल्मि हस्तियां, राजनीतिक कार्यकर्ता का हृदय क्यों नहीं पसीजा? असीफा के लिए सबको पीड़ा हुई और होनी भी चाहिए थी, किंतु इन पीड़ितों के लिए क्यों नहीं ? क्या ये कम मनुष्य थीं ? क्या इन्हें न्याय का अधिकार नहीं था ? क्या इनके कोई अधिकार नहीं थे ? क्या ये भारत की बेटियां नहीं थी? या इनकी नागरिकता कुछ कम थी ? क्यों हमारा समाज इनके लिए मुखरता से आवाज नहीं उठा सका ?
क्यों वे लोग जो आज पूरे हिन्दू धर्म और उसके अनुयायियों पर बलात्कारी होने का ठप्पा व् मुहर लगा रहे हैं वो इन पीड़ितों के अपराधियों की पहचान कर उनपर कोई ठप्पा व् मुहर नहीं लगाते हैं ? किस बात का डर है इन अपराधियों के विरुद्ध बोलने में? इन्होंने भी तो वही अपराध किया है की कठुआ वाले अपराधियों ने किया है फिर इनपर एक रहस्यमय चुप्पी क्यों ?

मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि आपका ये विरोध बड़ा सेलेक्टिव है जनाब, 3 महीने तक तैयारी कर एक आर्टिफिशियल माहौल बनाकर योजनाबद्ध रूप से जनता व् समाज की भावनाएं भड़काकर एक दुखद हृदयविदारक घटना को अपने एजेंडे के अंतर्गत भुनाना और पूरे हिन्दू समाज को अपराधबोध से ग्रसित कर उन्हें उनकी पहचान पर लज्जित कर देने की कूटनीति भोले भाले नागरिक नहीं समझ सकते, वे तो आज “I am ashamed to be a Hindu” लिखी तख्ती हाथ में पकडे अपने हिन्दू होने पर लज्जित हो रहे हैं किंतु क्या इनलज्जित हिंदुओंने कश्मीर में 20-22 हजार कश्मीरी हिंदु बेटियों के बलात्कार व् हत्या पर, असम, बंगाल व् केरल में प्रतिदिन हिन्दू महिलाओं के बलात्कार व् हत्याओं पर किसी अन्य मजहब के व्यक्ति को इसी प्रकार की तख्ती पकड़े देखा है?

हमारे समाज के लोग बहुत भोले हैं त्वरित प्रतिक्रिया देते हैं बिना सोचे समझे की इसका दूसरा पक्ष क्या है न ही उन्हें स्थानों की भौगोलिक व् राजनैतिक वस्तु-स्थिति का ज्ञान है,
 मैं महीने भर पूर्व ही जम्मू होकर आया हूँ और परिस्थितियाँ समझने हेतु वहां समय भी बिताया व् वहां के नागरिकों से बातचीत भी की,
थोड़ा प्रकाश डालना चाहूँगा इस विषय पर की कठुआ कश्मीर के जम्मू में स्थित है, जम्मू पूरे कश्मीर में एकमात्र ऐसा स्थान है जहाँ हिन्दू बहुसंख्यक है, कश्मीर घाटी से 5 लाख हिंदुओं को बलात्कार,  हत्या,  लूट-मार व् जनसंहार के द्वारा विस्थापित कर दिया गया था लगभग 1 लाख हिन्दू मार दिए गए थे, किंतु जम्मू में हिंदुओं की संख्या अधिक होने की वजह से ये कृत्य जम्मू में नहीं दोहराया जा सका,  और भारत के शत्रुओं को किसी भी कीमत पर यह स्थिति बदलनी है, अतः उन्होंने कुटिलता पूर्वक लाखों रोहिंग्या मुसलमानों को अवैध रूप से जम्मू में बसाया, जम्मू में हुए पिछले आतंकी हमले में आतंकियों को हफ्ते भर तक इन रोहिंग्याओं ने ही अपनी बस्तियों में छिपाकर रखा था, इन रोहिंग्या मुसलमानों के आने के बाद से जम्मू में अपराध का ग्राफ़ बहुत तेजी से बढ़ा है, जिससे वहां के मूल नगरिको में बड़ा रोश है और अब वो सड़कों पर उतरकर इन रोहिंग्याओं को जम्मू से निकालने हेतु अभियान चला रहे हैं, यदि ऐसा हो गया तो फिर जम्मू की डेमोग्राफी बदलकर जम्मू को इस्लामिक स्थान बनाने का उद्देश्य लटक जायेगा, अतः कहीं ऐसा तो नहीं की जम्मू के हिंदुओं के विरुद्ध माहौल बनाकर उन्हें डराने व् मुखर होकर रोहिंग्याओं का विरोध न करने के लिए आज जम्मू के हिंदुओं के विरुद्ध भावनाएं भड़काई जा रही है और मिडिया व् भारतीय समाज असीफा की घटना पर उद्वेलित होकर अनजाने में शत्रुओं के एजेंडे का एक औजार बन उनकी कठपुतली जैसा व्यवहार कर रहा है ?
अन्यथा देश के विभिन्न स्थानों पर ऐसी ही इतनी सारी वीभत्स घटनाओं पर चुप्पी और केवल जम्मू में घटित हुई घटना पर ही आक्रोश व् संवेदनशीलता वो भी तब जब अपराध के बाद ही आरोपियों को पकड़ लिया गया, और जिन वकीलों की बात हो रही है आपको बारीकी से देखना होगा की उन वकीलों का नेतृत्व कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद का निजी वकील, राजनितिक सलाहकार व् उसका दायाँ हाथ व् चुनावी एजेंट बी.एस सलाठिया के हाथ में है, जो पुराने काँग्रेसी है, और ये बात परिस्थिति को और भी संदिग्ध बना देती है      

वैसे सभी विरोध प्रदर्शनकारियों से कहना चाहूँगा की मैं आपकी भावना से जुड़ा हुआ हूँ, आपकी तरह मैं भी द्रवित हूँ दुखी हूँ, अपराधियों को कठोरतम दंड मिलना चाहिए ऐसी कामना करता हूँ किंतु आपके प्रति पूरे सम्मान के संग ये भी कहता हूँ की ये आपका कैम्पेन, ये विरोध प्रदर्शन, आपके लेख, आपके कार्टून, आपका आक्रोश, आपकी संवेदनशीलता, आपकी मानवता की दुहाई,  सेलेक्टिव व् पक्षपाती है जनाब, जब अपराधी हिन्दू होते हैं केवल तभी आपकी ये भावनाएं जागृत होती हैं, अन्य ऐसी घटनाओं पर आपकी चुप्पी आपकी निष्पक्षता के ऊपर एक बड़ा सा प्रश्नचिन्ह लगा देती है    

 रोहन शर्मा

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